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चलो मुद्दों की बात करते हैं

चलो मुद्दों की बात करते हैं
वही मुद्दे जिनसे वो डरते हैं


वादे जितने भी उनको करने हों
बेहिचक वो तो किया करते हैं


बात जो पूछ लो गरीबों की
वो अमीरों की बात करते हैं


आपने प्रश्न उनसे जो पूछे
देशद्रोही करार करते हैं


है कहाँ रोजगार गर पूछो
बैंड बाजे की बात करते हैं


क्या किसानों की करेंगे ये मदद
सोना, आलू से पैदा करते हैं


इनकी नज़रों में जनता उल्लू है
उल्लू ये सीधा किया करते हैं


विकास क्या करेंगे ये सबका
अपनी जेबों को भरा करते हैं


छोड़ के हस्पताल और सड़क
मंदिर मस्जिद की बात करते हैं


हर तरफ इंडिया तो डिजिटल है
राज  ये  अंगूठे  से  करते  हैं 


अपने फायदे के लिए देश के राज
लीक  ये  रोज  किया  करते  हैं


मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by विनय कुमार on March 18, 2019 at 11:16am

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी

Comment by नाथ सोनांचली on March 17, 2019 at 4:40pm

आद0 विनय जी अच्छी कविता लिखी आपने। बधाई स्वीकार कीजिये

Comment by विनय कुमार on March 16, 2019 at 2:29pm

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on March 16, 2019 at 2:28pm

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ सुशील सरना जी

Comment by Samar kabeer on March 16, 2019 at 7:58am

जनाब विनय कुमार जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on March 15, 2019 at 8:11pm

वाह आदरणीय एक यथार्थ को बहुत ही ख़ूबसूरती से आपने उजागर किया है। इस रचना के लिए दिल से बधाई।

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