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ग़ज़ल _वो कुछ न इसके सिवा करेंगे

ग़ज़ल _(वो कुछ न इसके सिवा करेंगे)

(मफा इला तुन _मफा इला तुन)

वो कुछ न इसके सिवा करेंगे l

बना के अपना दगा करेंगे l

किसी से हो जाए उनको उलफत

यही ख़ुदा से दुआ करेंगे l

सितम जफ़ा जिनकी ख़ास फितरत

वो कह रहे हैं वफ़ा करेंगे l

कभी हमें आज़मा के देखो

ये दिल है क्या जाँ फिदा करेंगे l

नज़र पे पहरे अगर लगे तो

खयाल में हम मिला करेंगे l

लगा के इलज़ामे बे वफाई

वो क्या मेरा सामना करेंगे l

करें वो तस्दीक लाख नफरत

हम उनसे उलफत सदा करेंगे l

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 4, 2019 at 7:16am

मुहतरम जनाब समर साहिब आ दाब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Samar kabeer on May 2, 2019 at 11:40am

जनाब तस्दीक़ अहमद साहिब आदाब,उम्द: ग़ज़ल हुई है,बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 2, 2019 at 7:22am

जनाब भाई लक्ष्मण धा मी साहिब, ग़ज़ल पसंद करने और आपकी हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on May 2, 2019 at 7:22am

जनाब भाई सुशील सरना साहिब, ग़ज़ल पर आपकी सुंदर प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत बहुत शुक्रिया I 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on May 2, 2019 at 5:30am

आ. भाई तस्दीक अहमद जी, अच्छी गजल हुयी है । हार्दिक बधाई।

Comment by Sushil Sarna on May 1, 2019 at 3:11pm

आदरणीय तस्दीक अहमद साहिब , आदाब। ... वाह दिलकश अहसासों का नूर बिखेरती शानदार ग़ज़ल। दिल से मुबारकबाद कबूल फरमाएं सर।

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