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ग़ज़ल:: सब ग़मों को भुला दिया जाए

सब ग़मों को भुला दिया जाए

थोड़ा सा मुस्कुरा दिया जाए

अश्क़ मैं पी चुका बहुत यारो
जामे उल्फ़त पिला दिया जाए

.

लो सियासत बदल गयी अब तो
हुक़्म उनका सुना दिया जाए

आँधियाँ तेज जब चलें, खुद को
अपने घर में बिठा दिया जाए

अब जलाकर 'अमर' बसेरा तुम
कह रहे ग़म भुला दिया जाए

"मौलिक और अप्रकाशित"  

Views: 452

Comment

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Comment by Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) on May 28, 2019 at 10:53pm

दिल से शुक्रिया आदरणीय सुशील शर्मा जी। 

Comment by Amar Pankaj (Dr Amar Nath Jha) on May 28, 2019 at 10:52pm

दिल से शुक्रिया आदरणीय नरेंदर सिंह चौहान जी। 

Comment by narendrasinh chauhan on May 28, 2019 at 6:55pm

खुबसुन्दर

Comment by Sushil Sarna on May 28, 2019 at 1:23pm

इस दिलकश ग़ज़ल के लिए दिल से बधाई आदरणीय पंकज साहिब।

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