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एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद

हुआ होगा मेरा जन्म

फिर एक दीर्घ प्रतीक्षा

और हुई होगी

मेरे बड़े होने की

और मेरे बड़े हो जाने पर

हो गया होगा उनकी 

सारी प्रतीक्षाओं का अंत

जिन्होंने मन्नतें माँगी होंगी

दुआयें की होंगी

उपवास रखे होंगे

मेरे आने की प्रतीक्षा में I  

(मौलिक /अप्रकाशित )

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 25, 2019 at 6:59pm

आ० समर कबीर जी  आपने हिम्मत बढ़ाई  शुक्रि, सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 25, 2019 at 6:58pm

आ० अग्रज निकोर जी. आपके शब्द बहुमूल्य हैं मेरे लिए . सादर 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 25, 2019 at 6:57pm

आ० भाई सुशील सरना जी , आपकी  हौसला अफजाई से आश्वस्त हुआ 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on June 25, 2019 at 6:55pm

आ० रक्षिता सिंह . सादर आभार 

Comment by Samar kabeer on June 24, 2019 at 11:37am

जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत ही गम्भीर,भावपूर्ण रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on June 22, 2019 at 6:25pm

पढ़ते ही हैरान हूँ, गदगद हूँ, कि आपने इतना गंभीर भाव कैसे शब्दबद्ध किया है। आपको हार्दिक बधाई, भाई गोपाल जी।*

*(मेरा हिन्दी font "hai" के लिए ठीक काम नहीं कर रहा)।

Comment by Sushil Sarna on June 22, 2019 at 4:22pm

वाह आदरणीय डॉ गोपाल जी वाह ... एक सूक्ष्म अनुभूति की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। हार्दिक बधाई स्वीकारें सर।

Comment by रक्षिता सिंह on June 22, 2019 at 4:14pm

आदरणीय गोपाल जी, नमस्कार 

बहुत सुन्दर  रचना।

कृपया ध्यान दे...

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