For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

बाढ़ का पानी- लघुकथा

सुबह से हो रही मूसलाधार बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी, अब तो दोपहर होने वाली थी. पिछले कई दिनों से बादल छाते तो थे लेकिन बरसने में कंजूसी कर देते थे, मानो इसरार की कामना रखते हों. मौसम पिछले कुछ दिनों की तुलना में काफी अच्छा हो गया था, उमस ख़त्म हो गयी. उसके इलाके में पानी भरने लगा था और आज वह काम पर भी नहीं जा पाया. दुकान में उसका एक दोस्त भी काम करता था, जिसने उसकी नौकरी लगवाई थी, ने मालिक को उसके न आ पाने का बता दिया था.
कल रात की उमस में जब वह खाना खाकर पड़ोस के रहमान भाई के यहाँ टी वी देखने गया तो उसके जिले से आने वाली खबरों ने उसे दहला दिया था. रात में ही उसने फोन किया, उसका गाँव अभी तक तो बाढ़ के प्रकोप से बचा था. लेकिन बाढ़ का पानी कभी भी उसके गाँव में घुस सकता था. बाबूजी ने उसे आस्वस्त कर दिया कि पूरा गाँव तैयार है और जैसे ही पानी नजदीक पंहुचेगा, वह लोग निकल जाएंगे.
वह भीगता हुआ फिर से रहमान भाई के घर पंहुचा, उसकी थोड़ी देर पहले ही गाँव पर बात हुई थी, लोग गाँव छोड़कर जा रहे थे. पानी अब धीरे धीरे रहमान भाई के घर के पास बहने लगा था और उनके बच्चे उस पानी में उछल कूद मचा रहे थे. उसको देखते ही वह चिल्लाये "अंकल, देखिये बाढ़ का पानी इधर भी आ गया. खूब मजा आ रहा है".
उसके अंदर एक झुरझुरी सी उठी, उसे तीन साल पहले का मंजर याद आ गया. बाढ़ ने उसका घर तो ढहा ही दिया था, घर की इकलौती गाय भी बाढ़ की भेंट चढ़ गयी थी. और फिर उसे अपना गाँव और परिवार छोड़कर महानगर के इस बजबजाते जगह पर रहना पड़ रहा था. पिछले दो साल की कमाई से उसका गाँव का घर किसी तरह बस रहने लायक ही बन पाया था. दरवाजे के सामने ही खड़ा वह बच्चों को खेलते देख रहा था, तभी उसके मुंह से अस्फुट स्वर में आवाज आयी "बाढ़ के पानी में मजा नहीं आता, बिलकुल नहीं आता".


मौलिक एवम अप्रकाशित

Views: 211

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by विनय कुमार on July 30, 2019 at 6:02pm

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब

Comment by विनय कुमार on July 30, 2019 at 6:01pm

इस टिप्पणी के लिए बहुत बहुत आभार आ शेख शहज़ाद उस्मानी साहब

Comment by Samar kabeer on July 20, 2019 at 8:31pm

जनाब विनय कुमार जी आदाब,बहुत अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on July 20, 2019 at 3:23pm

आदाब।.समसामयिक विषयांतर्गत पीड़ितों पर.बढ़िया रचना। हार्दिक बधाई आदरणीय विनय कुमार जी।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

surender insan replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"2122 2122 2122 212 कब कहा दुनिया मेरे हिस्से में आनी चाहिए।मुझ परिंदे को जरा सा दाना पानी…"
46 minutes ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. मनन जी,काम करते आना चाहिए नींद लेते आनी चाहिए सादर "
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अंजलि जी, उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ॰  नीलेश जी, लगता है: 'तुमको भी तो बात अपनी कहने  आनी चाहिए', होगा…"
1 hour ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी,यह शायर पर निर्भर है कि वो दर्शक चाहते हैं या श्रोता... अगर दर्शक चाहिए तो वहां क़िस्सा…"
2 hours ago
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आ. अनिल जी इसलिए इस देश को ये चाहते हैं बाँटनाक्यूँ कि हर नेता को अपनी राजधानी…"
2 hours ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीया अंजलि जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, तीसरा शेर कमाल हुआ है छठे शेर…"
2 hours ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आद . नीलेश जी 'इसलिए' कहने पर तकाबुल रदीफ़ हो जाएगा"
2 hours ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय अमित जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, पांचवां शेर कमाल हुआ है आदरणीय।"
2 hours ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आदरणीय योगराज प्रभाकर जी नमस्ते, ख़ूबसूरत ग़ज़ल पर बधाई स्वीकार करें आदरणीय, ख़ासतौर पर छठा और…"
2 hours ago
Anil Kumar Singh replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"आद. सालिक गणवीर जी उत्साह वर्धन हेतु धन्यवाद "
2 hours ago
Dimple Sharma replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-124
"2122       2122       2122      212 है…"
2 hours ago

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service