For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

‘अरे बहू ---‘
‘क्यों गला फाड़ रहे हैं , क्या है ?
‘अरे वो अपने शर्मा जी आये हैं , जरा चाय बना देना, बेटा I’
दस मिनट बाद बूढ़े ससुर ने फिर आवाज दी, ‘अरे बहू -----अभी तक चाय नही आयी ?’
अगले दस मिनट बाद ससुर ने फिर पुकारा .’अरे बहू---?’
शर्मा जी उठ खड़े हुए और हाथ जोड़ कर बोले ,’भाई साहब, चाय रहने दीजिये, मैं जरा जल्दी में हूँ I चाय फिर कभी –‘

(मौलिक/अप्रकाशित )

Views: 635

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Samar kabeer on September 7, 2019 at 11:33am

जनाब डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी आदाब,बहुत उम्द: और सशक्त लघुकथा के लिए बधाई स्वीकार करें ।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on September 5, 2019 at 12:39pm

बहुत ही कम शब्दों में आपने समाज का आइना प्रस्तुत कर दिया ... बहुत बहुत बधाई आदरणीय गोपाल नारायण साहब!

Comment by vijay nikore on September 3, 2019 at 8:24pm

आपकी लघु कथा ने हम सबको, समाज को, आईना दिखा दिया। युवा-व्यव्हार परवरिश पर निर्भर है, और बच्चों पर पड़ रहे बाहर के प्रभाव पर भी। बहुत ही सशक्त रचना। हार्दिक बधाई, आदरणीय डा० गोपाल नारायन जी।

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 31, 2019 at 1:52pm

आ० तेजवीर जी , शुक्रिया , मेहरबानी I 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 31, 2019 at 1:52pm

आ० शेख उस्मानी साहब , बहुत बहुत धन्यवाद 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on August 31, 2019 at 1:51pm

आभार विजय सर I 

Comment by TEJ VEER SINGH on August 30, 2019 at 10:38am

हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी। सम सामयिक एवम वर्तमान में परिवार में बहुओं के आचरण से भरपूर प्रासंगिक लघुकथा।वैसे भी आजकल यह स्पष्ट हो चुका है कि यदि आप ड्राइवर सीट पर नहीं हैं तो जो कुछ चाहिये उसके लिये निवेदन कीजिये, आदेश नहीं।सूक्ष्म शब्दों में बेहतरीन संदेश।

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on August 30, 2019 at 5:34am

आदाब। घर-घर की कहानी। स्वार्थी हुई मेजबानी और मेहमानी। औपचारिकता व्यावसायिकता के युग की मेहरबानी।  हार्दिक बधाई आदरणीय डॉ. गोपाल नारायण श्रीवास्तव जी।

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 30, 2019 at 12:53am

क्या कहें ? यही एक जीवन-शैली बन गई है , कहीं कहीं। कई तरह की विवशताएँ छिपी हैं इनके पीछे। बधाई , आदरणीय गोपाल नारायण जी , सादर।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"एक सप्ताह के लिए सभी चार आयोजन के द्वार खुल गए। अच्छी बात ये है कि यह एक प्रयोग है ..... लेकिन…"
15 hours ago
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"चौपाई छंद ++++++++   ठंड गई तो फागुन आया। जन मानस में खुशियाँ लाया॥ आम  लगे सब हैं…"
15 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सच फ़साना नहीं कि तुझ से कहें ये बहाना नहीं कि तुझ से कहें दिल अभी जाना नहीं कि तुझ से कहें ग़म…"
19 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"सादर अभिवादन "
19 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"सभी की नमस्कार, यूँ तो आज आयोजन प्रारंभ ही हुए हैं और किसी प्रकार की टिप्पणी करना उचित नहीं है,…"
22 hours ago
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-189
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-184
"स्वागतम"
yesterday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion ओ बी ओ लाइव आयोजनों से संबंधित महत्वपूर्ण चर्चा
"आपकी बात से सहमत हूँ। यह बात मंच के आरंभिक दौर में भी मैंने रखी थी। अससे सहजता रहती। लेकिन उसमें…"
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .विविध

दोहा सप्तक. . . . . . विविधकभी- कभी तो कीजिए, खुद से खुद की बात ।सुलझेंगे उलझे हुए,  अंतस के हालात…See More
Monday
amita tiwari posted blog posts
Monday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service