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यक्ष प्रश्न - लघुकथा -

यक्ष प्रश्न - लघुकथा -

गौतम ने बैंड बाजे  के साथ अपनी  एस यू वी गाड़ी से गणेश जी की प्रतिमा को विसर्जन हेतु दोनों बांहों में सहेज कर बाहर निकाला।

गौतम जैसे ही मूर्ति को लेकर  विसर्जन हेतु नदी के तट पर पहुंचा और मूर्ति को विसर्जित करने ही वाला था कि एक अज्ञात हाथ ने उसका हाथ पकड़ लिया।

गौतम अचंभित होकर उस हाथ को पहचानने की चेष्टा करने लगा। उसे यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि यह तो उसकी बाँहों में बैठे प्रभु गणेश का ही हाथ था।

 उसे लगा कि प्रभु इस अंतिम विदा की बेला में भावुक हो रहे हैं। यह सोच कर वह भी अति भावुक हो चला और उसकी आँखें भर आंई।

"गौतम मुझे तुमसे एक प्रश्न पूछना है?"

"क्यों नहीं प्रभु, आज तो मेरे जीवन का सर्वश्रेष्ठ दिन है कि इतने दिनों की पूजा आराधना का फल मुझे मिला है।"

"नदी के जिस जल में तुम मेरा विसर्जन करना चाहते हो, क्या तुम इस जल को इस योग्य समझते हो?"

बप्पा के प्रश्न से गौतम का मन आत्म ग्लानि से भर गया।

 मौलिक एवम अप्रकाशित

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 26, 2019 at 5:40am

आ. भाई तेजवीर जी, प्रदूषण को लेकर सटीक कथा हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 5, 2019 at 1:39pm

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ प्राची सिंह जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 5, 2019 at 1:37pm

हार्दिक आभार आदरणीय समर कबीर साहब जी। आदाब।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 5, 2019 at 1:37pm

हार्दिक आभार आदरणीय डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी।

Comment by TEJ VEER SINGH on October 5, 2019 at 1:36pm

हार्दिक आभार आदरणीय केवल प्रसाद "सत्यम" जी।

Comment by Samar kabeer on October 4, 2019 at 7:33am

जनाब तेजवीर सिंह जी आदाब,अच्छी लघुकथा लिखी आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 3, 2019 at 3:13pm

सचमुच जल स्रोतों के प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक है 
लघुकथा अपना सन्देश देने में सफल है 

बधाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on September 28, 2019 at 12:33pm

गजब, आ० तेजवीर जी , बहुत  करीने से नदी प्रदूषण पर आपने सवाल उठाया है ? आपकू बधाई ई\

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on September 27, 2019 at 8:44pm

आ. तेजवीर जी, आपने बहुत ही सुंदर और सटीक चित्र खींचा है. बहुत बहुत बधाई/ फिर भी संक्षिप्तता में अभी भी कुछ करना शेष रहा गया है.  शुभ शुभ

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