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रंग हम ऐसा लगाने आ गये - विमल शर्मा 'विमल'

प्रेम हम तुम पर लुटाने आ गये।
आज फिर देखो सताने आ गये।

चूम अधरों को तुम्हारे अब प्रिये,
लालिमा इनकी बढ़ाने आ गये।

लाज से हैं झुक रहे तेरे नयन,
आज हम इनको लुभाने आ गये।

देख यौवन की छटा मधुरिम शुभे,
प्रेम रस में हम डुबाने आ गये।

छूटता है जो नहीं प्रिय उम्र भर,
रंग हम ऐसा लगाने आ गये।

रूप से छलके सुरा जो मद भरी,
आज हम पीने पिलाने आ गये।

-विमल शर्मा 'विमल'
स्वरचित एवं अप्रकाशित

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Comment by विमल शर्मा 'विमल' on December 11, 2019 at 5:27pm

आदरणी अग्रज लक्ष्मण धामी जी कोटिशः आभार एवं धन्यवाद

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 5, 2019 at 9:17am

आ. भाई विमल जी, सुंदर गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by विमल शर्मा 'विमल' on October 29, 2019 at 2:04pm

बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय समर कबीर साहब

Comment by Samar kabeer on October 29, 2019 at 12:00pm

जनाब विमल शर्मा 'विमल' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें ।

'प्रेम हम तुम पर लुटाने आ गये।
आज फिर तुमको सताने आ गये'

इस मतले के ऊला में 'तुम' और सानी में 'तुमको' शब्द उचित नहीं,बहतर होगा सानी में 'तुमको' की जगह "देखो" कर लें।

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