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ठण्डी गहरी चाँदनी

चिंताओं की पहचानी

काल-पीड़ित

अफ़सोस-भरी आवाज़ें ...

पेड़ों से उलझी रोशनी को

पत्तों की धब्बों-सी परछाई से 

प्रथक करते

अब महसूस यह होता है

सपनों में

सपनों की सपनों से बातें ही तो थीं

हमारा प्यार

या उभरता-काँपता

धूल का परदा था क्या

विश्वासों में पला हमारा प्यार

आईं

व्यथाओं की ज़रा-सी हवाएँ

धूल के परदे में झोल न पड़ी

वह तो यहाँ वहाँ

कण-कण जानें कहाँ गया

झड़ गया

या, सपना था

खुलना था, खुल गया

उड़ते-उड़ते भटकते

कुछ-एक कण

ठहर गए आँखों के कोरों में 

किरकिरी-से अटके

रात-बेरात तब से

अब बेचैन बीतती है रात

              ------

-- विजय निकोर

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by vijay nikore on November 9, 2019 at 7:21am

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र फूल सिंह जी।

Comment by vijay nikore on November 9, 2019 at 7:20am

इतनी सुविचारित सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र विजय शंकर जी।

Comment by PHOOL SINGH on November 8, 2019 at 1:00pm

एक सुंदर रचना के लिए आपको बहुत बहुत बधाई 

Comment by Dr. Vijai Shanker on November 8, 2019 at 8:51am

आदरणीय विजय निकोर जी , “ जगत मिथ्या ” के दर्शन पर लिखी आपकी यह रचना “काल पीड़ित”होने का सहीं अंकन कर रही है , अंत में सबकुछ ऐसे ही एक भ्रम सा लगता है , क्योंकि हाथ कुछ लगता नहीं हैं। यादें भी सिर्फ और सिर्फ हमारी ही होती हैं , हम उन्हें ज़िंदा रखना चाहें या हम हीं उन्हें विस्मृत करें और मिट जाने दें।
आप सदैव ही बहुत गहरी और गंभीर रचनाएं रचते हैं , इसके लिए भी बहुत बहुत बधाई , सादर।

Comment by vijay nikore on November 8, 2019 at 7:14am

 इस सुन्दर सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र सुरेन्द्र नाथ जी।

Comment by vijay nikore on November 8, 2019 at 7:13am

ऐसी मनोहर सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी।

Comment by नाथ सोनांचली on November 7, 2019 at 10:56pm

आद0 विजय निकोर जी सादर अभिवादन। बढ़िया भाव सम्प्रेषण के साथ उम्दा कलमकारी। बधाई निवेदित है। सादर

Comment by Samar kabeer on November 7, 2019 at 12:05pm

प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,आपने ख़ूबसूरत शब्दों से बहुत उम्द: मंज़र कशी की है और अपने भावों को बहतर तरीक़े से पेश किया है,इस सुंदर कविता के लिए बधाई स्वीकार करें ।

Comment by vijay nikore on November 5, 2019 at 7:31pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र सुशील जी।

Comment by vijay nikore on November 5, 2019 at 7:30pm

सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र लक्ष्मण धामी जी

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