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शाम के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

जले दिवस भर धूप में, चलते - चलते पाँव
क्यों ओ! प्यारी शाम तुम, जा बैठी हो गाँव।१।

रोज शाम को झील पर, आओ प्यारी शाम
गोद तुम्हारी सिर रखूँ, कर लूँ कुछ आराम।२।

जब तक हो यूँ पास में, तुम ओ! प्यारी शाम
थकन भरे हर पाँव को, मिल जाता आराम।३।

बेघर पन्छी डाल पर, बैठा है उस पार
आयी प्यारी शाम है, खोलो कोई द्वार।४।

कितनी प्यारी शाम है, इत उत फैली छाँव
निकले चादर छोड़ कर, जी बहलाने पाँव।५।

आयी प्यारी शाम थी, नगर छोड़कर गाँव
देख उसे फिर लग गये, यादों को भी पाँव।६।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 29, 2019 at 1:35pm

आ. भाई सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।

Comment by नाथ सोनांचली on November 28, 2019 at 8:28pm

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। बढिया दोहे सृजित किये आपने। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 28, 2019 at 6:19am

आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थित हो असीमित मान प्रदान करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Usha on November 27, 2019 at 8:36am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' सर, शाम बहुत सारे अहसासों का भण्डार है। यह आशाजनक भाव बेहद खूबसूरती से पिरोया है आपने इन दोहों में। साथ ही नगर और गाँव के जीवन का फ़र्क़ भी। बधाई स्वीकार करें। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 26, 2019 at 5:19am

आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा और मार्गदर्शन के लिए आभार । 

Comment by Samar kabeer on November 25, 2019 at 2:37pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।

मेरे ख़याल से 'शाम' तुम की जगह "तू" से सम्बोधित किया जाए तो ज़ियादा अपनापन लगेगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 25, 2019 at 5:28am

आ. भाई सलीम रजा जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 25, 2019 at 5:26am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by SALIM RAZA REWA on November 21, 2019 at 9:11pm

मुबारकबाद भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी अच्छे दोहे हुए हैं ।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 20, 2019 at 1:04pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।बेहतरीन दोहे।

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