For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

शाम के दोहे - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

जले दिवस भर धूप में, चलते - चलते पाँव
क्यों ओ! प्यारी शाम तुम, जा बैठी हो गाँव।१।

रोज शाम को झील पर, आओ प्यारी शाम
गोद तुम्हारी सिर रखूँ, कर लूँ कुछ आराम।२।

जब तक हो यूँ पास में, तुम ओ! प्यारी शाम
थकन भरे हर पाँव को, मिल जाता आराम।३।

बेघर पन्छी डाल पर, बैठा है उस पार
आयी प्यारी शाम है, खोलो कोई द्वार।४।

कितनी प्यारी शाम है, इत उत फैली छाँव
निकले चादर छोड़ कर, जी बहलाने पाँव।५।

आयी प्यारी शाम थी, नगर छोड़कर गाँव
देख उसे फिर लग गये, यादों को भी पाँव।६।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

Views: 75

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 29, 2019 at 1:35pm

आ. भाई सुरेंद्र जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 28, 2019 at 8:28pm

आद0 लक्ष्मण धामी जी सादर अभिवादन। बढिया दोहे सृजित किये आपने। बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 28, 2019 at 6:19am

आ. ऊषा जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थित हो असीमित मान प्रदान करने के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by Usha on November 27, 2019 at 8:36am

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' सर, शाम बहुत सारे अहसासों का भण्डार है। यह आशाजनक भाव बेहद खूबसूरती से पिरोया है आपने इन दोहों में। साथ ही नगर और गाँव के जीवन का फ़र्क़ भी। बधाई स्वीकार करें। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 26, 2019 at 5:19am

आ. भाई समर कबीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति, प्रशंसा और मार्गदर्शन के लिए आभार । 

Comment by Samar kabeer on November 25, 2019 at 2:37pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब,अच्छे दोहे लिखे आपने,बधाई स्वीकार करें ।

मेरे ख़याल से 'शाम' तुम की जगह "तू" से सम्बोधित किया जाए तो ज़ियादा अपनापन लगेगा ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 25, 2019 at 5:28am

आ. भाई सलीम रजा जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और प्रशंसा के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on November 25, 2019 at 5:26am

आ. भाई तेजवीर जी, सादर अभिवादन। दोहों पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार।

Comment by SALIM RAZA REWA on November 21, 2019 at 9:11pm

मुबारकबाद भाई लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी अच्छे दोहे हुए हैं ।

Comment by TEJ VEER SINGH on November 20, 2019 at 1:04pm

हार्दिक बधाई आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी।बेहतरीन दोहे।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीया सुनन्दा झा जी विषय को चरितार्थ जरती बहुत बढ़िया रचना बधाई हो"
21 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी विषयानुकूल बहुत बेहतरीन छंद लिखा बहुत बहुत बधाई"
23 minutes ago
narendrasinh chauhan commented on Sushil Sarna's blog post दो मुक्तक (मात्रा आधारित )......
"बहोत सुन्दर सर। ........."
57 minutes ago
Usha Awasthi shared Admin's discussion on MySpace
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"प्रथम प्रस्तुति - दोहा छंद जो कुल नारी का करे, देवी सा सत्कारउस कुल लेते जन्म हैं, अंशों में…"
7 hours ago
sunanda jha replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-110
"लावणी छन्द कोमल है तू कभी कुसुम सी ,तीखी कभी कटारी है। रूप ईश का लेकर नारी ,धरती पर अवतारी…"
11 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय लक्ष्मण जी।"
13 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post एनकाउंटर(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय समर जी।"
13 hours ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post नागरिक(लघुकथा)
"शुक्रिया आदरणीय।"
13 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post कुछ ज्वलन्त विषयों पर कुण्डलिया
"आद0 महेंद्र जी सादर अभिवादन, रचना पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन का अभिनन्दन स्वागत"
15 hours ago
SALIM RAZA REWA posted a blog post

कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया - सलीम 'रज़ा'

 221 2121 1221 212        कैसे कहें की इश्क़ ने क्या क्या बना दिया              राधा को श्याम श्याम…See More
20 hours ago
Samar kabeer commented on vijay nikore's blog post तुम न आना ...
"प्रिय भाई विजय निकोर जी आदाब,बहुत उम्द: रचना हुई है,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।"
20 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service