For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

पानी पर चंद दोहे :

पानी पर चंद दोहे :

प्यासी धरती पर नहीं , जब तक बरसे नीर।
हलधर कैसे खेत की, हरित करे तकदीर।१ ।

पानी जीवन जीव का, पानी ही आधार।
बिन पानी इस सृष्टि का, कैसे हो शृंगार।२ ।

पानी की हर बूँद में, छुपा हुआ है ईश।
अंतिम पल इक बूँद से, मिल जाता जगदीश।३ ।

पानी तो अनमोल है, धरती का परिधान।
जीवन ये हर जीव को, प्रभु का है वरदान।४ ।

बूँद बूँद अनमोल है, इसे न करना व्यर्थ।
अगर न चेते आज तो, होगा बड़ा अनर्थ।५ ।

जल संरक्षण के लिए, किया न अगर प्रयास।
कैसे मानव फिर भला, बुझ पाएगी प्यास।६ ।

श्यामवर्ण सा हो गया, दूषित गंगा नीर।
धरती दूषित नीर की, किसे सुनाये पीर।७ ।

कैसे बदलें मेघ अब, धरती की तकदीर।
जंगल सारे कट गए, बरसे कैसे नीर।८।

जल बिन जीना है कठिन, मानव को है ज्ञान।
क्यों संरक्षण की तरफ, जाता उसका ध्यान।९ ।

कहीं बुझाता प्यास ये, कहीं करे संहार।
पानी तेरे रूप की महिमा अपरम्पार।१० ।

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 181

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Sushil Sarna on December 5, 2019 at 7:35pm

आदरणीय  Mahendra Kumar जी सृजन पर आपकी ऊर्जावान प्रतिक्रिया का दिल से आभार।आदरणीय आप सही हैं टंकण त्रुटि रह गई। अभी संशोधित करता हूँ। हार्दिक आभार इस त्रुटि की तरफ ध्यान आकर्षित करने का। 

Comment by Mahendra Kumar on December 4, 2019 at 5:43pm

पानी पर बढ़िया दोहे कहे हैं आपने आदरणीय सुशील सरना जी। हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए।

मुझे लगता है कि "पानी का हर बूँद में" की जगह "पानी की हर बूँद में" होना चाहिए। देख लीजिएगा।

सादर।

Comment by Sushil Sarna on December 3, 2019 at 7:15pm

आदरणीय  vijay nikore जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by vijay nikore on November 30, 2019 at 9:16pm

आप दोहों की विधा में माहिर हैं, अच्छे लिखे। बधाई, मित्र सुशील जी।

Comment by Sushil Sarna on November 30, 2019 at 8:42pm

आदरणीय  SALIM RAZA REWA'  जी आपकी ऊर्जावान प्रशंसा से सृजन धन्य हुआ , तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on November 30, 2019 at 8:42pm

आदरणीय  सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप'  जी आपकी ऊर्जावान प्रशंसा से सृजन धन्य हुआ , तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on November 28, 2019 at 8:42pm

आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन रचना पर दिल खोल कर बधाई स्वीकार कीजिये। सादर

Comment by SALIM RAZA REWA on November 26, 2019 at 8:39pm

पानी पर सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई

Comment by Sushil Sarna on November 26, 2019 at 4:04pm

आदरणीय समर कबीर साहिब, आदाब , सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

Comment by Sushil Sarna on November 26, 2019 at 4:04pm
आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन पर आपकी आत्मीय प्रशंसा का तहे दिल से शुक्रिया।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

कुछ दोहे : प्रश्न - उत्तर:.....

प्रश्नों का प्रासाद है, जीवन की हर श्वास । मरीचिका में जी रहा, कालजयी विश्वास । ।प्रश्नों से मत…See More
14 minutes ago
Sushil Sarna replied to Sushil Sarna's discussion भक्तिरस के दोहे : in the group धार्मिक साहित्य
"आदरणीय  लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सृजन के भावों को आत्मीय मान देने का दिल से…"
1 hour ago
सालिक गणवीर posted a blog post

जिसको हम ग़ैर समझते थे...(ग़ज़ल : सालिक गणवीर)

2122 1122 1122 22जिसको हम ग़ैर समझते थे हमारा निकला उससे रिश्ता तो कई साल पुराना निकला (1)हम भी…See More
2 hours ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'  जी सादर नमस्कार  आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल…"
8 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल
"आ. भाई बसंतकुमार जी, सादर अभिवादन । अच्छी गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
12 hours ago
बसंत कुमार शर्मा posted a blog post

तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए.- ग़ज़ल

मापनी १२२ १२२ १२२ १२  कई ख़्वाब देखे मचलते हुए.तुम्हीं आये हरदम टहलते हुए. तबस्सुम के पीछे छिपे…See More
13 hours ago
Rupam kumar -'मीत' posted blog posts
13 hours ago
Sarfaraz kushalgarhi commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"मुहतरम लक्ष्मण धामी मुसाफ़िर जी नवाज़िश के लिये आपका दिली शुक्रियः खुशालगढ़ी नहीं कुशलगढ़ी"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Sushil Sarna's discussion भक्तिरस के दोहे : in the group धार्मिक साहित्य
"आ. भाई सुशील जी, भक्तरस के सुन्दर दोहे रचे हैं हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' joined Admin's group
Thumbnail

धार्मिक साहित्य

इस ग्रुप मे धार्मिक साहित्य और धर्म से सम्बंधित बाते लिखी जा सकती है,See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to आशीष यादव's discussion कइसे होई गंगा पार in the group भोजपुरी साहित्य
"आ. भाई आशीष जी, बहुत अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sarfaraz kushalgarhi's blog post नाज़ नख़रों का अंदाज़....
"आ. भाई सरफराज खुशालगढ़ी जी, सादर अभिवादन । उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।"
yesterday

© 2020   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service