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gazal...

पतंगों को यूँ  ढील मत देना.

कभी झूठी दलील मत देना.
हालात बना देंगे मजबूर तुझे.
नादान हांथों में कील मत देना.
 दुनिया है ये ताड़ बना सकती है 
इसकी हथेली पर तील मत देना
जिरह करनी है अपने-आप से गर.
खुद को जज्बातों का वकील मत देना.
तुम्हारे घर भी इज्जत का सामान है!
सरे -राह  इशारे  अश्लील मत देना.
अविनाश बागडे.

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on April 24, 2012 at 10:14pm

खुद को जज्बातों का वकील मत देना. तुम्हारे घर भी इज्जत का सामान है! bahut khoob soorat nasihat saaf saaf, adarrniya mahoday badhai. 

Comment by MAHIMA SHREE on April 24, 2012 at 4:59pm
दुनिया है ये ताड़ बना सकती है
इसकी हथेली पर तील मत देना....

खुद को जज्बातों का वकील मत देना.
तुम्हारे घर भी इज्जत का सामान है!

वाह .... हरेक पंक्तियाँ कितनी खूबसूरती से सच्चाई बयाँ कर रही है ...
अविनाश सर क्या कहने है , बहुत -२ बधाई आपको
Comment by AVINASH S BAGDE on April 24, 2012 at 3:58pm

Abhinav ji,Mridu ji,Vandana ji,Satish sir,Sundeep ji,Rajesh kumari mam.,aadarniy Vinas ji,aur Rakesh ji.....sabhi sudhijano ka hriday se aabhar....

Comment by Abhinav Arun on April 24, 2012 at 12:49pm

हर शेर में एक नया ख़याल उभरा है और मजबूती के साथ हार्दिक बधाई अविनाश जी ||

Comment by satish mapatpuri on April 24, 2012 at 1:36am

दुनिया है ये ताड़ बना सकती है

इसकी हथेली पर तील मत देना
वाह अविनाश जी ....... बॉल चाहरदीवारी के पार .... छका ...... बधाई हो
Comment by CA (Dr.)SHAILENDRA SINGH 'MRIDU' on April 23, 2012 at 10:39pm
जिरह करनी है अपने-आप से गर.
खुद को जज्बातों का वकील मत देना.
खुबसुरत भावाभियक्ति पर बधाई स्वीकार करें
Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on April 23, 2012 at 8:37pm

बहुत ही सुन्दर ग़ज़ल प्रस्तुत की आपने|

तुम्हारे घर भी इज्जत का सामान है!
सरे -राह  इशारे  अश्लील मत देना. --------- बहुत ख़ूब...

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 23, 2012 at 3:20pm

vaah avinaash ji bahut umda bhaav,achhi nasihat deti hui ghazal .badhaai 

Comment by वीनस केसरी on April 23, 2012 at 3:14pm

सुन्दर भावाभिव्यक्ति

Comment by राकेश त्रिपाठी 'बस्तीवी' on April 23, 2012 at 12:15pm

Vah, bahut khub,

जिरह करनी है अपने-आप से गर.
खुद को जज्बातों का वकील मत देना.

Aadarneey Avinaash ji, Sadar Badhai.

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