For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल 

अज़ीज़ बेलगामी

हर शब ये फ़िक्र चाँद के हाले कहाँ गए
हर सुबह ये खयाल उजाले कहाँ गए

अब है शराब पर या दवाओं पे इन्हेसार
जो नींद बख्श दें वो निवाले कहाँ गए

वो इल्तेजायें मेरी तहज्जुद की क्या हुईं
थी अर्श तक रसाई, वो नाले कहाँ गए

मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब
मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए

दस्ते कलम में आज भी अखलाक सोज़ियाँ
किरदारसाज थे जो रिसाले, कहाँ गए

गुलशन के बीच खिलने लगे हैं कँवल 'अज़ीज़'
कीचड में ढूँढता हूँ के लाले कहाँ गए"

Views: 721

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Azeez Belgaumi on May 15, 2011 at 11:17pm

सौरभ  पांडे जी ... आप ने कलाम पसंद किया .. ये मेरे लिए बड़ी हिम्मत अफजाई की बात है .. आप का शुक्रिया :

अज़ीज़ बेलगामी

09900222551


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 15, 2011 at 7:22pm

अज़ीज़ साहब आदाब..

इन बेहतर शेरों के लिये आपका शुक्रिया.

//मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब
मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए..//  ........ वाह.

Comment by Azeez Belgaumi on May 15, 2011 at 3:30pm
धन्यवाद् वंदना जी .. इसी तरह नवाजते रहें ..
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551
Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 12:00pm
Ganesh Jee Bagi
की खिदमत में आदाब ... बहुत मशकूर हूँ के आप ने मेरी ग़ज़ल पसंद फरमाई
Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:55am
शुक्रिया इस्मत जैदी जी
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:54am
डॉ. नमन दत्त जी  आप की हौसला अफजाई मेरे लिए बाईसे सद इफ़्तेख़ार है
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:50am
रना प्रताप सिंह साहिब ... आप की मोहब्बतोउन का शुक्रिया
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:49am
बहुत  बहुत  शुक्रिया  तिलक  राज  कपूर  जी ....इसी तरह हिम्मत अफजाई करते रहें
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on May 14, 2011 at 11:24am

वाह साहब वाह।

खूबसूरत मुकम्‍मल ग़ज़ल के लिये बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on May 14, 2011 at 9:57am

अज़ीज़ साहब इस मेयारी शायरी के लिए ढेरों मुबारकबाद| आपके ओ बी ओ पर मौजूदगी हमेशा हमारे लिए फख्र का बायस रही है|

 

हर शब ये फ़िक्र चाँद के हाले कहाँ गए

हर सुबह ये खयाल उजाले कहाँ गए

 

शब् में चाँद का हाला और सुबह उजाला ....प्रतीकों में कही गई गहरी बात

 

अब है शराब पर या दवाओं पे इन्हेसार
जो नींद बख्श दें वो निवाले कहाँ गए

 

आज की कडवी सच्चाई

 

वो इल्तेजायें मेरी तहज्जुद की क्या हुईं
थी अर्श तक रसाई, वो नाले कहाँ गए

 

बहुत खूब

 

मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब
मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए

लाजावाब शेर

 

और मकता भी बेहतरीन| ढेर सारी दाद कबूलिये|

 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
Saturday
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
Jul 14
Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
Jul 14
Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
Jul 14
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
Jul 11
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"वायव्य दशा के प्रस्तुतीकरण के क्रम में बना विश्वास प्रस्तुति की शाब्दिकता को स्थापित करता हुआ सफल…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
Jul 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
Jul 10

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service