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ग़ज़ल 

अज़ीज़ बेलगामी

हर शब ये फ़िक्र चाँद के हाले कहाँ गए
हर सुबह ये खयाल उजाले कहाँ गए

अब है शराब पर या दवाओं पे इन्हेसार
जो नींद बख्श दें वो निवाले कहाँ गए

वो इल्तेजायें मेरी तहज्जुद की क्या हुईं
थी अर्श तक रसाई, वो नाले कहाँ गए

मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब
मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए

दस्ते कलम में आज भी अखलाक सोज़ियाँ
किरदारसाज थे जो रिसाले, कहाँ गए

गुलशन के बीच खिलने लगे हैं कँवल 'अज़ीज़'
कीचड में ढूँढता हूँ के लाले कहाँ गए"

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Comment

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Comment by Azeez Belgaumi on May 15, 2011 at 11:17pm

सौरभ  पांडे जी ... आप ने कलाम पसंद किया .. ये मेरे लिए बड़ी हिम्मत अफजाई की बात है .. आप का शुक्रिया :

अज़ीज़ बेलगामी

09900222551


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on May 15, 2011 at 7:22pm

अज़ीज़ साहब आदाब..

इन बेहतर शेरों के लिये आपका शुक्रिया.

//मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब
मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए..//  ........ वाह.

Comment by Azeez Belgaumi on May 15, 2011 at 3:30pm
धन्यवाद् वंदना जी .. इसी तरह नवाजते रहें ..
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551
Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 12:00pm
Ganesh Jee Bagi
की खिदमत में आदाब ... बहुत मशकूर हूँ के आप ने मेरी ग़ज़ल पसंद फरमाई
Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:55am
शुक्रिया इस्मत जैदी जी
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:54am
डॉ. नमन दत्त जी  आप की हौसला अफजाई मेरे लिए बाईसे सद इफ़्तेख़ार है
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:50am
रना प्रताप सिंह साहिब ... आप की मोहब्बतोउन का शुक्रिया
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

Comment by Azeez Belgaumi on May 14, 2011 at 11:49am
बहुत  बहुत  शुक्रिया  तिलक  राज  कपूर  जी ....इसी तरह हिम्मत अफजाई करते रहें
अज़ीज़ बेलगामी
09900222551

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Tilak Raj Kapoor on May 14, 2011 at 11:24am

वाह साहब वाह।

खूबसूरत मुकम्‍मल ग़ज़ल के लिये बधाई।


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on May 14, 2011 at 9:57am

अज़ीज़ साहब इस मेयारी शायरी के लिए ढेरों मुबारकबाद| आपके ओ बी ओ पर मौजूदगी हमेशा हमारे लिए फख्र का बायस रही है|

 

हर शब ये फ़िक्र चाँद के हाले कहाँ गए

हर सुबह ये खयाल उजाले कहाँ गए

 

शब् में चाँद का हाला और सुबह उजाला ....प्रतीकों में कही गई गहरी बात

 

अब है शराब पर या दवाओं पे इन्हेसार
जो नींद बख्श दें वो निवाले कहाँ गए

 

आज की कडवी सच्चाई

 

वो इल्तेजायें मेरी तहज्जुद की क्या हुईं
थी अर्श तक रसाई, वो नाले कहाँ गए

 

बहुत खूब

 

मंजिल पे आप धूम मचाने लगे जनाब
मुझ को ये फ़िक्र, पांव के छाले कहाँ गए

लाजावाब शेर

 

और मकता भी बेहतरीन| ढेर सारी दाद कबूलिये|

 

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