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ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।

*जीवन
उलझन ।

* सूने
आँगन ।

* घर-घर
अनबन ।

* उजड़े
गुलशन ।

* खोया
बचपन ।

*भटका
यौवन ।

* झूठे
अनशन ।

* ख़ाली
बरतन ।

* सहमी
धड़कन ।

.
मौलिक और अप्रकाशित ।

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Comment

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Comment by pratibha pande on September 26, 2017 at 6:00pm

वाह बहुत खूब आदरणीय ,  मोहम्मद आरिफ जी , ढेरों  बधाइयाँ आपको इस उपलब्धि पर I आगे भी आप ऐसी  कई बुलंदियाँ छूएँ, ईश्वर  से कामना करती हूँ    

Comment by Mohammed Arif on September 26, 2017 at 5:09pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीय आशतोष जी ।
Comment by Mohammed Arif on September 26, 2017 at 5:08pm
आदरणीय सौरभ पांंडे जी आदाब,आपकी उत्साहजनक प्रतिक्रिया और हौसला अफज़ाई का बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 26, 2017 at 3:21pm

आदरणीय आरिफ जी इस समाचार को सुनकर बेहद खुशी हुयी आपकी इस सफलता पर ढेरों बधाई सादर 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on September 26, 2017 at 2:15pm

भाई मो. आरिफ़ जी, यह अत्यंत ही प्रसन्नता का विषय है, कि ऐसा रचनात्मक कार्य न केवल सराहा गया, बल्कि स्वीकारा भी गया है. आपका सहयोगात्मक व्यवहार और आपकी प्रयास-प्रक्रिया इस अभिनव पटल पर अनवरत बनी रहे. ओबीओ के लिए यह सूचना वस्तुतः हर्षातिरेक के क्षण ले कर आयी है. 

हार्दिक शुभकामनाएँ और अशेष बधाइयाँ .. 

शुभ-शुभ

Comment by Mohammed Arif on September 26, 2017 at 1:15pm
बहुत-बहुत आभार आदरणीय निलेश जी ।
Comment by Nilesh Shevgaonkar on September 26, 2017 at 11:31am

बहुत बहुत बधाई ..खूब ग़ज़ल हुई है 

Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 10:29pm
आदरणीय दिनेश कुमार जी आदाब, आपकी उत्सासजनक प्रतिक्रिया पाकर धन्य हो गया ।आपका बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 10:27pm
आदरणीय महेंद्र कुमार जी आदाब, आपकी उत्साहजनक टिप्पणी से अभिभूत हूँ । यह सब के पकी दुआओं से संभव हो पाया है । बहुत-बहुत आभार आपका ।
Comment by दिनेश कुमार on September 25, 2017 at 7:54pm
बहुत उम्दा। वाह वाह आरिफ साहब। ग़ज़ल और इस शानदार उपलब्धि पर मेरी तऱफ से भी हार्दिक बधाई। वाह वाह वाह

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