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ग़ज़ल (बह्र -फेलुन) यह ग़ज़ल दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल है। इसे "गोल्डन बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स" में शामिल किया गया है ।

*जीवन
उलझन ।

* सूने
आँगन ।

* घर-घर
अनबन ।

* उजड़े
गुलशन ।

* खोया
बचपन ।

*भटका
यौवन ।

* झूठे
अनशन ।

* ख़ाली
बरतन ।

* सहमी
धड़कन ।

.
मौलिक और अप्रकाशित ।

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Comment by Mahendra Kumar on September 25, 2017 at 7:47pm

वाह! इतनी छोटी बह्र में ग़ज़ब के शेर निकाले हैं आपने और यही सबसे अच्छी बात है. "वर्ल्ड रिकॉर्ड" तो बोनस है. एक बार पुनः इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. आपके भविष्य के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ. सादर.

Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 7:43pm
बहुत-बहुत शुक्रिया आली जनाब मोहतरम समर कबीर साहब । यह सब आपकी दुआओं और कुशल मार्ग दर्शन से ही संभव हो पाया है । आपके बग़ैर यह मुमकिन नहीं था । फिर से आभार ।
Comment by Samar kabeer on September 25, 2017 at 5:45pm
जनाब मोहम्मद आरिफ़ साहिब आदाब,दुनिया की सबसे छोटी ग़ज़ल,वाह बहुत ख़ूब, इस प्रस्तुति पर दिल से बधाई स्वीकार करें ।
Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 5:44pm
उत्साहजनक टिप्पणी देने और हौसला अफज़ाई का बहुत-बहुत आभार आदरणीय आशुतोष जी ।
Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 5:42pm
हौसला अफज़ाई और उत्साहजनक टिप्पणी का बहुत-बहुत शुक्रिया आदरणीय तस्दीक़ अहमद जी ।
Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 5:40pm
आदरणीय सुशील सरना जी आदाब, हौसला अफज़ाई , उत्साहवर्धन और सुंदर टिप्पणी का बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Mohammed Arif on September 25, 2017 at 5:37pm
आदरणीय मिथिलेश वामनकर जी हौसला अफज़ाई का बहुत-बहुत आभार ।
Comment by Dr Ashutosh Mishra on September 25, 2017 at 5:01pm

आदरणीय आरिफ जी वाकई में कमाल की ग़ज़ल ..इस शानदार रचना के लिए हार्दिक बधाई सादर

Comment by Tasdiq Ahmed Khan on September 25, 2017 at 2:26pm
मुहतरम जनाब आरिफ साहिब ,इस अदभुत ग़ज़ल के कारनामे के लिए मुबारकबाद क़ुबूल फरमाएं
Comment by Sushil Sarna on September 25, 2017 at 2:12pm

आदरणीय मो.आरिफ साहिब आदाब , गज़ब गज़ब गज़ब। ... कितना असहाय महसूस कर रहा हूँ शब्दों के अभाव में  ... वो शब्द कहाँ से लाऊँ जो इस स्वर्ण सृजन को अलंकृत कर सकें।  इस दिलकश अंदाज़ की ग़ज़ल के लिए मेरी हार्दिक हार्दिक बधाईयां स्वीकार करें। आपकी कलम, कल्पना और निर्बाध प्रवाह को सलाम सलाम सलाम। 

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