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कितनी अपनी है जिंदगी --- डॉ o विजय शंकर

अपनी होते हुए भी कितनी अपनी है जिंदगी ,
हम नाचते हैं जिंदगी भर , नचाती है जिंदगी।

बस में बिलकुल नहीं है किसी के भी जिंदगी
खुद पर जिंदगी भर कितनी हावी है जिंदगी।

हसरत है तुझे जी लें एक बार अपने ही ढंग से
पर तू तो अपने ही ढंग से जिलाती है जिंदगी।

वो नाचने वाला है ,हुनर है , यही रोजी है उसकी ,
उसको भी अपने ही ढंग से नचाती है जिन्दंगी |

उसकी मर्जी ,करम कैसे - कैसे कराती है जिंदगी
निष्ठुर अपने ही ढंग से हँसाती-रुलाती है जिंदगी |

कितने हैं जो काँटों में भी सुकून से ज़िंदा रह लेते हैं
सेज-फूल पर भी कांटे कैसे कैसे चुभाती है जिंदगी |

ये खुशियाँ , ये गम , लगता है अपने ही किये का फल है ,
पर सजायें तो कुछ अपने ही ढंग से दिलाती है जिंदगी।



मौलिक एवं अप्रकाशित
डॉo विजय शंकर

Views: 614

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Comment by Dr. Vijai Shanker on January 25, 2015 at 7:59pm
बहुत बहुत आभार आदरणीय इंजीo गणेश जी बागी जी, सुन्दर मूल्यांकन एवं बधाई के लिए. सादर।

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on January 25, 2015 at 4:42pm

सुन्दर और भावयुक्त अभिव्यक्ति हुई है, बहुत बहुत बधाई आदरणीय डॉ विजय शंकर जी.

Comment by Dr. Vijai Shanker on January 25, 2015 at 9:14am
रचना पसंद कर स्वीकार करने एवं आपकी बधाई के लिए ह्रदय से धन्यवाद आदरणीय हरी प्रकाश दुबे जी, सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 25, 2015 at 8:55am
प्रिय जीतेन्द्र जी, रचना पसंद करने के लिए एवं आपकी बधाई के लिए बहुत बहुत धन्यवाद, सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 25, 2015 at 8:51am
बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय राहुल जी, सादर।
Comment by Hari Prakash Dubey on January 24, 2015 at 7:56pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर बहुत सुन्दर रचना ..........

अपनी होते हुए भी कितनी अपनी है जिंदगी ,
हम नाचते हैं जिंदगी भर , नचाती है जिंदगी।.....शानदार , हार्दिक बधाई ! सादर 

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on January 24, 2015 at 7:36pm

बेहद खूबसूरत रचना , आदरणीय डा. विजय जी. हार्दिक बधाई स्वीकारें

Comment by Rahul Dangi Panchal on January 24, 2015 at 7:09pm
सुन्दर रचना आदरणीय!
Comment by Dr. Vijai Shanker on January 23, 2015 at 10:27pm
रचना अपने भावों सहित आप तक पहुंची , आपको पसंद आई, उसे सार्थकता मिली। आपकी बधाइयों के लिए ह्रदय से धन्यवाद, आदरणीय शिज्जु शकूर जी, सादर।

सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on January 23, 2015 at 9:42pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर बहुत खूबसूरत भावों की अभिव्यक्ति है बहुत बहुत बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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