For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कलयुग हैं , कलियुगी होना चाहिए ---डॉo विजय शंकर

आदमी को समय के साथ चलना चाहिए
कलयुग में हैं तो कलियुगी होना चाहिये ॥
चालाकियां होश्यारियां हुनर सब अपने लिए हैं
काम दूसरे का हो तो मासूम बन जाना चाहिए ॥
अपने सब काम क़ानून को ताख पर रख कर कर लें
दूसरे को सारे नियम क़ानून बताना चाहिए ॥
बात किसी की कभी काटनी नहीं चाहिए
काम किसी का भी हो करना नहीं चाहिए ॥
कहना किसी का भी हो मोड़ना नहीं चाहिए
तिनका किसी के लिए भी तोड़ना नही चाहिए ॥
आदमी को समय के साथ साथ चलना चाहिए
कलयुग में हैं तो घोर कलियुगी होना चाहये ॥
हमें अपने युग का सम्मान का करना चाहिए
कलयुग में हैं तो घोर कलियुगी होना चाहिए॥

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 692

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Dr. Vijai Shanker on August 25, 2015 at 9:04am
आदरणीय सुश्री महिमा जी , आपका आभार एवं धन्यवाद। सादर।
Comment by Dr. Vijai Shanker on August 25, 2015 at 9:02am
प्रिय मिथिलेश जी , आपका आभार एवं धन्यवाद। टंकण की त्रुटियों को सही कर दिया, पुनः आभार, सादर।
Comment by kanta roy on August 25, 2015 at 9:01am

वाह ! वाह ! क्या गजब बात कही है आपने कलयुगी आदमी की ! आदमी को समय के साथ चलना चाहिए

कलयुग में हैं तो कलियुगी होना चाहिये ॥.....अद्भुत !

काम दूसरे का हो तो मासूम बन जाना चाहिए ॥........ ये मासूमियत भी बडी़ कमाल की है । क्या खूब कटाक्ष हुई है ... पढकर दंग हो गये । बधाई हो आदरणीय डा. विजय शंकर जी ।

Comment by pratibha pande on August 25, 2015 at 8:51am
सच है,हम सब अपने अपने ढंग से समय के साथ ही तो चल रहे हैं , बहुत तीखी ,पर सच्चाई बयां करती रचना बधाई आपको आदरणीय डॉ विजय शंकर जी
Comment by MAHIMA SHREE on August 24, 2015 at 9:27pm

अच्छी रचना है सर बधाई  आपको


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on August 24, 2015 at 12:06pm

आदरणीय डॉ विजय शंकर सर इस कलयुगी जमाने पर व्यंग्य करती बढ़िया रचना हेतु हार्दिक बधाई. निवेदन है कि रचना में टंकण त्रुटियों को देख लीजियेगा.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"सादर अभिवादन"
2 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"स्वागतम् "
10 hours ago
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"आदरणीय विजय निकोर जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय "
21 hours ago
Admin added a discussion to the group चित्र से काव्य तक
Thumbnail

'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178

आदरणीय काव्य-रसिको !सादर अभिवादन !!  ’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ…See More
Wednesday
amita tiwari posted a blog post

गर्भनाल कब कट पाती है किसी की

कहीं भी कोई भी माँ अमर तो नहीं होती एक दिन जाना होता ही है सब की माताओ को फिर भी जानते बूझते भी…See More
Tuesday
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post दोहा दशम. . . . . उम्र
"भाई सुशील जी, सारे दोहे जीवन के यथार्थ में डूबे हुए हैं.. हार्दिक बधाई।"
Tuesday
vijay nikore posted a blog post

प्यार का पतझड़

एक दूसरे में आश्रय खोजतेभावनात्मक अवरोधों के दबाव मेंकभी ऐसा भी तो होता है ...समय समय से रूठ जाता…See More
Tuesday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"प्रारम्भ (दोहे) अंत भला तो सब भला, कहते  सब ये बात। क्या आवश्यक है नहीं, इक अच्छी…"
Sunday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"आदरणीय  जयहिंद रायपुरी जी अच्छा हायकू लिखा है आपने. किन्तु हायकू छोटी रचना है तो एक से अधिक…"
Sunday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"हाइकु प्रारंभ है तो अंत भी हुआ होगा मध्य में क्या था मौलिक एवं अप्रकाशित "
Apr 11
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185
"स्वागतम"
Apr 11
Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
Apr 8

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service