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उमर भर
का साथ
निभ जाता
कभी एक ही
पल मैं
बुलबुले मैं
उभरने वाले
अक्स की उमर
होती है
फक्त एक ही
पल की

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Comment by satish mapatpuri on June 16, 2010 at 12:58pm
बुलबुले मैं
उभरने वाले
अक्स की उमर
होती है
फक्त एक ही
पल की
अनुपम, अतुलनीय
Comment by दुष्यंत सेवक on June 16, 2010 at 11:59am
sundar rachna ko padhkar waah bhi nikalti hai ek hi pal me kintu jehan me rahti hai umra bhar ke liye........dhanyavaad rajni ji....ek sundar rachna ke liye
Comment by कमलेश भगवती प्रसाद वर्मा on June 16, 2010 at 11:51am
bahut sunder rchna ..aur jyada ki ummeed...

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on June 16, 2010 at 9:52am
इतने कम अल्फाज़ और इतनी बुलंद ख्याली ? आदरणीय रजनी जी यह हुनर सिर्फ आप ही के पास है ! में सलाम कहता हूँ आपकी लेखनी को !

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on June 16, 2010 at 8:58am
रजनी दीदी , आपकी यह नन्ही सी प्यारी कविता बहुत ही अच्छी बनी है, धन्यवाद,
Comment by Admin on June 16, 2010 at 8:11am
एक गहरी बात, बहुत सुंदर , पहले की तरह यह भी अच्छी रचना है, बधाई,
Comment by Pallav Pancholi on June 16, 2010 at 1:48am
बहुत सुदार रचना है.....

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