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इंतेज़ार

इंतज़ार!
उसके आने का!
की आकर रोक लेगा....
मेरे बहते अश्रुधार को!
थकान...दर्द..
उदासी..तड़प..
समेट लेगा सब
अपनी बाहों में!!
मेरी नाराजगी का बुलबुला
फूट जाएगा..
उसकी छुवन से!!
शाम हुई!
हुआ इंतेज़ार पूरा!
वो आया!
और कर गया अधूरा!
उसका आना
सच था...
या सपना??
मार गया मुझे!
उसका
अपरिचित सा मिलना!!


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on January 9, 2019 at 2:34pm — 5 Comments

बरसात

ये नाज़ुक से नगीने-
जिनसे करके श्रृंगार,
इठलाता है,
सदाबहार!
यूँ तो
बहुत शीतल हैं..
मखमली हैं !
पर इन्हें छूते ही,अधरों से,
जिस्म में
आग सी जली है!
ये एहसास कुछ
जाना पहचाना-सा है !
तेरे अधरों की तरह
इनमें भी,,
मयखाना-सा है!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 20, 2018 at 1:06pm

जलती मुस्कुराहटें

कुछ
छिल रहा है!
भीतर-भीतर!
दुख रहा..
नासूर जैसा!!
क्या है ये!
तुम्हारी चुप्पी?
या मेरी उदासी ??
नस-नस में
बेचैनियाँ!
घड़ी-घड़ी घबराहटें !!
क्यों पड़ी हैं आज ?
जलते तवे पर...
रोटियों की जगह-
मेरी मुस्कुराहटें!!

मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 16, 2018 at 9:16pm — 8 Comments

काली स्याही

सजल आँखें,,बोझल मन !
अनुत्तरित प्रश्न ! टूटता बदन !
कुछ फिक्र ! कुछ लाचारी !
कुछ चाही...........,
कुछ अनचाही जिम्मेदारी !
ये कहानी थी कभी शामों की!
पर अब,,न जाने क्यों...
सूरज सर पे चमकता है,
फिर भी रातों का अंधेरा,,
आँखों से नहीं छंटता है ।
मैं लिख रही दास्तान---
बदलते हुए हालात की !
कि अब सफेद सुबहों में,
घुली है............
काली स्याही...रात की....!


मौलिक व अप्रकाशित

Posted on October 15, 2018 at 12:24pm — 9 Comments

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At 5:59pm on May 17, 2025, Erica said…

I need to have a word privately,Could you please get back to me on ( mrs.ericaw1@gmail.com)Thanks.

 
 
 

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