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मिथिलेश वामनकर's Discussions (7,388)

Discussions Replied To (5725) Replies Latest Activity

सदस्य टीम प्रबंधन

"आदरणीय राणा सर, इस शेर में संशोधन कर चुका हूँ और आपने भी उसे ग़ज़ल में यथा स्थान अंकित…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 53 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

37 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"मंच में प्रस्तुत मेरी पहली ग़ज़ल का मतला  आपकी ज़िद वही पुरानी थीहर गलत बात तर्जुमानी…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 53 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

37 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"बड़ी सुन्दर बड़ी अच्छी हुई गज़लें दिवाली में ... "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 52 में सम्मिलित सभी ग़ज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

15 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"कुछ लाल मिसरे अब तक लाल है."

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 51 में शामिल सभी गज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

9 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"खूब गुर्राया था सूरज आसमाँ में दो पहरदेख फ़ीका हो गया है, बदलियाँ छाने के बाद वाह "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to 'ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा गोल्डन जुबली अंक' में शामिल ग़ज़लों का संकलन(चिन्हित मिसरों के साथ)

55 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"बड़ी अच्छी बह्र है  'खामोश रहेंगे और तुम्हे हम अपनी कहानी कह देंगे' 22 112 22 112 22…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-49 की सभी रचनाओं का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

32 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

प्रधान संपादक

"तमाम उम्र समेटा जिसे समझ अपनापता चला कि सिफ़र के सिवा कुछ और नहीं वाह वाह "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-48 में प्रस्तुत सभी रचनाएँ

23 Jul 19, 2021
Reply by Deepanjali Dubey

सदस्य टीम प्रबंधन

"अश्क़ तेरे कहे हैं, पूछ मुझेमुझसे मिलकर उदास भी हो क्या छोटी बह्र में बेहतरीन गज़लें "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 45 में सम्मिलित सभी गज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

30 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"खिड़कियों में बैठती हैं आजकलइन हवाओं में नमी होने लगीदेखते ही सब भँवर गहरे हुएएक धारा…"

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक -44 में शामिल सभी ग़ज़लों का संकलन चिन्हित मिसरों के साथ

15 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

सदस्य टीम प्रबंधन

"एक पत्थर ही सही गौर से देखो इस ओरतुम अगर चाहो मुझे बुत में बदल जाऊँगा वाह वाह "

मिथिलेश वामनकर replied Apr 26, 2015 to ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा अंक 43 में सम्मिलित सभी गज़लों का संकलन (चिन्हित मिसरों के साथ)

5 Apr 26, 2015
Reply by मिथिलेश वामनकर

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"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
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