For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग-1)

साथियों,
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -1) अत्यधिक डाटा दबाव के कारण पृष्ठ जम्प आदि की शिकायत प्राप्त हो रही है जिसके कारण "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2) तैयार किया गया है, अनुरोध है कि कृपया भाग -1 में केवल टिप्पणियों को पोस्ट करें एवं अपनी ग़ज़ल भाग -2 में पोस्ट करें.....

कृपया मुशायरे सम्बंधित अधिक जानकारी एवं मुशायरा भाग 2 में प्रवेश हेतु नीचे दी गयी लिंक क्लिक करें 

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-100 (भाग -2)

Views: 11179

Replies are closed for this discussion.

Replies to This Discussion

दुश्मने जाँ कहा गया है मुझे।

ज़िन्दगी भर छला गया है मुझे।।

नर्म लह्ज़े में बात की उनसे।

फिर भी पत्थर कहा गया है मुझे।।

हिचकियाँ आ रही हैं रह रह कर।

याद शायद किया गया है मुझे ।।

जिसको मैं दिल से प्यार करता था।

छोड़ कर वो चला गया है मुझे।।

झूठ कह कर भी बिल्यकीं सच का।

आईना वो दिखा गया है मुझे।।

आंँख से अश्क अब नहीं गिरते।

"सब्र करना तो आ गया है मुझे"।।

जिसका जल्वा है सारे आलम में।

उसका आशिक़ कहा गया है मुझे ||

जब कि शादाब है मेरा ,गुलशन,।

नाम सहरा दिया गया है मुझे।।

मौलिक, अप्रकाशित

बहुत खूब।

आखिरी शेर जानदार

आप का बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम

जनाब अशफ़ाक अली साहिब आदाब, 

ओपनिंग के लिए हार्दिक बधाई। 

आप का बहुत बहुत शुक्रिया

आप का बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम

जनाब अशफ़ाक़ साहिब आदाब,अच्छी ग़ज़ल है, बधाई स्वीकार करें ।

दूसरे और छटे शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ दोष है ।

मक़्ते का ऊला मिसरा बह्र में नहीं है ।

आप का बहुत बहुत शुक्रिया मोहतरम समर कबीर साहब जोभी गलती है वो लिखदें मेहरबानी होगी

लिख तो दी भाई ।

बहुत-बहुत शुक्रिया

बेहतरीन आग़ाज़ और पेशकश हेतु तहे दिल से बहुत-बहुत मुबारकबाद मुहतरम जनाब अशफ़ाक़ अली (गुलशन ख़ैराबादी) साहिब।

आप का बहुत बहुत शुक्रिया जनाब

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post मातृभाषा हिन्दी
"परमादरणीय गुरुदेव सादर अभिवादन आपके अनमोल उत्साह वर्धन से मन आह्लादित हुआ आपका दिल से आभार,इस…"
1 hour ago
Manan Kumar singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल
"जी जनाब समर जी,नमस्ते।आपका बहुत बहुत शुक्रिया।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बासुदेव अग्रवाल 'नमन''s blog post असबंधा छंद "हिंदी गौरव
"आ. भाई बासुदेव जी, अच्छी रचना हुई है । हार्दिक बधाई ।"
1 hour ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on TEJ VEER SINGH's blog post जलेबी - लघुकथा -
"शानदार लघुकथा सृजित हुई है आदरणीय..."
1 hour ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Manoj kumar Ahsaas's blog post एक ग़ज़ल मनोज अहसास इस्लाह के लिए
"बहुत ही खूब ग़ज़ल कही है भाई मनोज जी..बधाई"
1 hour ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on Tasdiq Ahmed Khan's blog post गज़ल _तुम चाहे गुज़र जाओ किसी राह गुज़र से
"वाह आदरणीय वाह बेहद खूब ग़ज़ल हुई..."
1 hour ago
बृजेश कुमार 'ब्रज' commented on गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s blog post अरसा गुज़र गया है कोई गुफ़्तुगू नहीं (६२ )
"वाह वाह आदरणीय क्या ही शानदार ग़ज़ल कही है...बधाई"
1 hour ago
vijay nikore commented on Dr. Vijai Shanker's blog post क्षणिकाएं —डॉo विजय शंकर
"आनन्द आ गया आपकी अच्छी सोच से। बधाई , मित्र विजय शंकर जी।"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post अन्तस्तल
"मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार, भाई समर कबीर जी।"
1 hour ago
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post अन्तस्तल
"मान देने के लिए आपका हार्दिक आभार, मित्र सुशील जी।"
1 hour ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post हिंदी...... कुछ क्षणिकाएं :
"वाह, क्या कटाक्ष है इन सुन्दर क्षणिकायों में। आनन्द आ गया। बधाई, मित्र सुशील जी।"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दीप बुझा करते है जिसके चलने पर - गजल( लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर')
"आ. भाई समर जी सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति के लिए हार्दिक धन्यवाद । क़वाफ़ी के संदर्भ में यदि सम्भव…"
2 hours ago

© 2019   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service