For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे पूछताछ

"OBO लाइव तरही मुशायरे"/"OBO लाइव महा उत्सव"/"चित्र से काव्य तक" प्रतियोगिता के सम्बन्ध मे यदि किसी तरह की जानकारी चाहिए तो आप यहाँ पूछताछ कर सकते है !

Views: 4026

Reply to This

Replies to This Discussion

mhautsv ank 9 hetu rachnaaen khan posr kren

मुख्य पृष्ठ पर फोरम में लिंक रहता है, आप महा उत्सव के बैनर को भी क्लिक कर रचना पोस्ट कर सकते है, अभी उक्त महा उत्सव समाप्त हो गया है |

च लो ज़िन्दगी को मो हब्बत ब ना दें
1 2 2 1 2 2 1 22 1 2 2


Please Koi Ye batayega ki
(1) Kya ye mene upar sahi counting ki he ??

(2) agar ye sahi he to मो ko 1 aur को ko 2 kyo?

(3) shayad ye मो ko gira kar kiya jaa raha he, aisa mene gajal ki kaksha me pada thaa, but confusion he...pls explain me this...

Thanks

तपन जी जैसा की आप जानते है, ग़ज़ल ध्वनी आधारित मात्रिक छंद है ......

 

च1लो2 ज़िन२/ द1गी2 को२/ मु1हब२बत२/ ब1ना2दें२

 

इस तकतई को देख ले, उम्मीद है आप समझ गए होंगे | एक बात और ग़ज़ल शिल्प आदि के सम्बन्ध मे तकनिकी जानकारी ग़ज़ल की कक्षा से प्राप्त करे,

मेरे विचार में मात्रा का उच्चारण किस  तरह किया जा रहा यह महत्वपूर्ण है , जरूरत के हिसाब से 'मो' का उच्चारण १ या २ दोनों में से कोई भी हो सकता  है ...

मोहब्बत का मो कभी २ नहीं हो सकता क्योंकि मोहब्बत का उच्चारण मुहब्बत की तरह किया जाता है| उसी तरह जिस तरह तोहफा का तो कभी २ नहीं सकता क्योंकि सही उच्चारण तुहफ की तरह होता है|

thanks ganesh ji

महोदय,

एक सुझाव करना चाहता हूँ l

"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - १३ --- जितनी भी गज़लें प्रदर्शित हुई,उनमेंसे उम्दा बेहतरीन शेर चुन चुन कर अगर समापन किया तो एक 'ख़ूबसूरत महा-ग़ज़ल 'तैयार हो जायेगी l


---- अरविंद 

सुझाव
"ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक - १६ के लिए नया मिसरा दिया गया है जो कि निदा साहब की मशहूर ग़ज़ल से लिया गया है

"ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटा कर देखो"


आपने इस मिसरे का वज्न लिखा है
2122            2122       2122        22 

ज़िन्दगी क्या/ है किताबों/ को हटा कर/ देखो
फायलातुन फायलातुन  फायलातुन फैलुन

मगर इस ग़ज़ल का वज्न यह नहीं अपितु
२१२२ / ११२२ / ११२२  / २२

है
तख्तीय कर रहा हूँ देख लें
यदि आप बह्र बदल देंगे तो जो लोग धुन के पर लिखते हैं उनको लिखने में दिक्कत होगी और यह नियमतः गलत भी है
निवेदन है कि लोग इस मिसरे पर लिखना शुरु करें उससे पहले ही आप इसे बदल दें अथवा बह्र बदल कर सही लिख दें
सही बह्र हैं
२१२२ / ११२२ / ११२२ / २२
फाएलातुन / फएलातनु / फएलातुन / फैलुन
रमल मुसममन मख़बून महज़ूफ़


वीनस जी आपके सुझाव का स्वागत है, आपके द्वारा उस ग़ज़ल को ही यहाँ लगायी गयी थी जिस ग़ज़ल से तरही मिसरा उठाया गया था, सबसे पहले तो मैं उस ग़ज़ल को हटा दिया, क्योकि मूल ग़ज़ल का प्रभाव तरही की ग़ज़ल पर पड़ सकता है |

बहर के बारे में आवश्यक निर्णय प्रधान संपादक जी से विमर्श के पश्चात् लिया जायेगा | 

त्वरित प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद
मुझे विश्वास है कि आप सोच विचार कर सही निर्णय लेंगे


वांछित सुधार कर दिया गया है |

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Naveen Mani Tripathi commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - चाँद छिपता रहा फासले के लिए
"आ0 कबीर सर सादर नमन । घूटने शब्द का अर्थ निगलने से है । शेष सुधार भी कर रहा हूँ ।"
12 minutes ago
vijay nikore commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - रोशनी है अगर तेरे दिल में- ( गिरिराज भंडारी )
"बहुत ही खूबसूरत गज़ल कही है। बधाई, आदरणीय गिरिराज जी।"
18 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on SALIM RAZA's blog post जब भी देखूँ वो मुझे  चाँद नज़र आता है: सलीम रज़ा रीवा
"अच्छा प्रयास है आदरणीय  SALIM RAZA साहिब , आदरणीय  Samar kabeer जी…"
32 minutes ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post संवाद -एक ग़ज़ल
"आदरणीय रवि शुक्ला जी राक्षस को का विकल्प दानव एकदम सही सुझाया आपने, तो शब्द को भी बदलकर इस प्रकार…"
1 hour ago
vijay nikore commented on मंजूषा 'मन''s blog post ग़ज़ल
"गज़ल अच्छी लगी। बधाई, आदरणीया मंजूषा जी।"
1 hour ago
बसंत कुमार शर्मा commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post संवाद -एक ग़ज़ल
"आदरणीय Samar kabeer जी ग़ज़ल को आपने अपना अमूल्य समय दिया दिल सेउक्रिया आपका, आपके कथन का…"
1 hour ago
vijay nikore commented on बृजेश कुमार 'ब्रज''s blog post ग़ज़ल...वही बारिश वही बूँदें वही सावन सुहाना है-बृजेश कुमार 'ब्रज'
"अच्छी गज़ल कही। दिल से बधाई, बृजेश जी।"
1 hour ago
vijay nikore commented on Sushil Sarna's blog post लौट आओ ....
" माता-पिता के प्रति बहुत ही सुन्दर, मार्मिक भावपूर्ण रचना। हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।"
1 hour ago
नयना(आरती)कानिटकर added a discussion to the group पुस्तक समीक्षा
Thumbnail

शफ़क--राजकुमारी नायक का कविता संग्रह

श्रीमती राजकुमारी नायक का काव्य संग्रह शफ़क  जब हमारी लेखिका संघ की अध्यक्षा आ. अनिता सक्सेना जी ने…See More
2 hours ago
Samar kabeer commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल - चाँद छिपता रहा फासले के लिए
"जनाब नवीन मणि त्रिपाठी जी आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । मतले का सानी मिसरा भर्ती…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on SALIM RAZA's blog post जब भी देखूँ वो मुझे  चाँद नज़र आता है: सलीम रज़ा रीवा
"जनाब सलीम रज़ा साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ । मतले के सानी…"
2 hours ago
नयना(आरती)कानिटकर joined Admin's group
Thumbnail

पुस्तक समीक्षा

इस ग्रुप में पुस्तकों की समीक्षा लिखी जा सकती है |
2 hours ago

© 2017   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service