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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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धरम-अधरम के

धरम-अधरम के बात जनि करिह तू  I पईसा बनाइह त भईया नाही लड़ीह तू I   लूटे के बाटे त मिलिए के रहीह हो I चोर के चोर बाबु कबो ना काहीह तू I   जा…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Sep 2, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

हाय रे राजनीती ,

हाय रे राजनीती , तू केतना निचे जाइब , महंगाई तहरा ना लाउकी , केतना के मुआईबा , हाय रे राजनीती ,तू केतना निचे जाइब , आटा चाउर के भाव के छोड…

Started by Rash Bihari Ravi

0 Aug 27, 2011

एकदिन अइसन आई (भोजपुरी कहानी )

एकदिन अइसन आई                             ------बृज भूषण चौबे                    रामजस के आज एगो मन के मुराद पूरा हो गइल रहे | सुबेरे -सुबे…

Started by Brij bhushan choubey

4 Aug 19, 2011
Reply by Dr.Brijesh Kumar Tripathi

कईसन आजादी इ , हमके ना बुझाइल ,

कईसन आजादी इ , हमके ना बुझाइल , बानी आजाद हमार , आखँ भर आइल , पईसा बा लगे बाबु , बोल तोहार बोलेला , पईसा नइखे लगे , टांग ले खिचाइल , बापू…

Started by Rash Bihari Ravi

1 Aug 16, 2011
Reply by satish mapatpuri

अइसन कब होई , "भोजपुरी धारावाहिक कहानी" "तिसरका कड़ी"

  "दुसरकी कड़ी" इहवाँ क्लिक करीं तिसरकी कड़ी . बियाह अबहीं ना करब बोल के विजय घर के भितरी चलि गइलन. तब रघुनाथबाबू कहलन,  "नया खून बा, चिंता…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Aug 14, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

अइसन कब होई , "भोजपुरी धारावाहिक कहानी" "दुसरका कड़ी"

(पहिलका कड़ी) iha dekhi   रघुनाथ सिंह अपना दुआर पर चार पाँच आदमी के संगे बाईठल रहूआन चौकी पर एगो प्लेट में बिस्कुट आउर चनाचूर रखल रहुये सब…

Started by Rash Bihari Ravi

6 Aug 12, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

अइसन कब होई , "भोजपुरी धारावाहिक कहानी" "पहिलका कड़ी"

भोजपुरी धारावाहिक कहानी अइसन कब होई (पहिलका कड़ी)   बाबू देवव्रत सिंह आपन जनेऊ के माँजत (घुमाइ-घुमाइ पानी निकालत) मंदिर के सीढ़ी से उतरत र…

Started by Rash Bihari Ravi

4 Aug 12, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

भोजपुरी साहित्य में माई के गीत के साथ 'अतेन्द्र' क आगाज़ .......

टन-टन टन-टन घंटा बाजे           मईया तोरे दुआरे आस लगाके खड़ा बा निर्धन              कब से तेरे सहारे ओ मईया दे दे तू दर्सन्वा रे------ओ  …

Started by Atendra Kumar Singh "Ravi"

8 Aug 6, 2011
Reply by Er. Ganesh Jee "Bagi"

खेतवा में लिखल बाटे जेकर हो करमवा

खेतवा में लिखल बाटे जेकर हो करमवा  हथवा में हल लेईके चलेले हो किसनवा l    नाहीं कौनों फईसन बाटे अपने  त देहियाँ   बचल खुचल उमड़ेले बचवन पे…

Started by Atendra Kumar Singh "Ravi"

1 Aug 5, 2011
Reply by आशीष यादव

भोजपुरी गजल लिखे के कोशिश

भोजपुरी गजल लिखे के कोशिश  तहरा इयाद के सहारे जीवन बिता देम ,तू चाह त गोरी तोहके आपन बना लेम ,  मन में बसल बारू तू मेहमान बन के , चाह्बू…

Started by Rash Bihari Ravi

3 Aug 3, 2011
Reply by Rash Bihari Ravi

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दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
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"आदरणीय अशोक भाईजी, वर्षा ऋतु, विशेषकर सावन मास, के नम क्षणों का रागात्मक वर्णन रोचक बन पड़ा है.…"
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"आ. भाई अशोक जी, सादर अभिवादन। पावस पर सुंदर चौपाइयों की रचना हुई है। हार्दिक बधाई।"
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चौपाइयाँ

दोहाबरखा के बढ़ते क़दम, आये  हैं  अब पास।दूर नहीं है साजना, सुरभित सावन मास।। चौपाईवह फुहार वह साथ…See More
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"  आदरणीय चेतन प्रकाश साहब सादर नमस्कार, यही तो मुख्य है विषय है इस रचना का. नदी नहीं उफ़नाई है.…"
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Chetan Prakash commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय,  अशोक  रक्ताले साहब, नमस्कार  !  लेकिन  यह कैसी "रिमझिम…"
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Profile IconShyamsundar Chatterjee , Alamseti ajita kumar and Dr. Mohd Israr joined Open Books Online
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Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत रचना की सारगर्भित समीक्षा कर आपने मेरे सृजन कार्य को सार्थकता…"
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Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"परम आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम - सर सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार…"
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Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
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Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . .मंच
"संसार का मंच एक गंभीर विषय है. तदनुरूप आपका प्रयास श्लाघनीय है, आदरणीय सुशील सरना जी.  कई…"
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Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post बरसात
"आदरणीय अशोक भाईजी, कितनी निष्कपट, कितनी भोली, कितनी सरस कविता हुई है ! जैसे, कोई अबोध बच्चा…"
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