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भोजपुरी साहित्य Discussions (249)

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करकट नर-कट

आप   कहीं   माई कहीं   बापू सँगे लुगाई धोती हटि पतलून त  खदरा कमरि, रजाई  खदरा कमरि, रजाई बदल संस्कृति  परिपाटी  जाति पाति भेदे नही      प…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

4 Sep 23, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

लगाव गाँछि

आव अपना दुअरा लगाव गाँछि नीम क सुधरि जाई हावा पानी घरवा जमीन क पितरन के दिनवा भुलाई ना जुगाड़ से हरियाली  देत उनकर नाम दिन चीन्ह क  लरिक…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

3 Sep 23, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

गीत भोजपुरी

राजा जी की बगिया में, सुगवा सुगीनिया में-2 लागल बावे प्रेमवा के डोर, ए सुगी मार ना हनि हनि ठोर-2 फुलवा लोरहन गइलीं जनक-दुलारी। ओही बगिया प…

Started by रामबली गुप्ता

1 Sep 20, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

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भोजपुरी ग़ज़ल

१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ फलनवा बन गइल मुखिया रङाइल गोड़ माथा ले     [फलनवा - कोई ; रङाइल - रंगा हुआ ; गोड़ - पैर बनल खेला बिगाड़े के.. चिलनवा ठाढ़…

Started by Saurabh Pandey

3 Sep 20, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

प्रीत क पहुनवा

चिहुँकि उठिह  भोर भइला के पहिले  जब  देखिह सपनवा मिलनवा के  धीरज जनि छोड़िह  कदम जनि मोड़िह  परेम पग रहिया  खनकि उठिह  जस  गीत काढ़े कलाई…

Started by PRAMOD SRIVASTAVA

6 Sep 10, 2016
Reply by PRAMOD SRIVASTAVA

गर्मी के महीना

गर्मी के महीना में हमरा मन में इ बात उठेला कि हमनी का काहे ना हिल स्टेषन में पैदा भइली जां। ओहिजा हमनी का ना जायेके पड़ीत। एहिजे ठंडा के मज…

Started by indravidyavachaspatitiwari

2 Jul 22, 2016
Reply by KALPANA BHATT ('रौनक़')

शराबबंदी

मरदे! उ काहे गभुआइल बा लागता उ तनी भकुआइल बा। ठंढा पानी से पिआस जाई का? उ बोतल खातिर छुछुआइल बा। शराबबंदी के एलान का भइल ताड़ी तनी अधिके बउर…

Started by Manan Kumar singh

1 Jun 16, 2016
Reply by Manan Kumar singh

नवगीत - मोहित मिश्रा

पियवा गइलें परदेश राह ताकत बाडी सूनी अँखियाँ, बन गइले विधवा के भेष, पियवा गइलें परदेश। कह के त गइलें सैया कुछ दिन के काम बा, थोडे दिन के…

Started by Mohit mishra

3 May 19, 2016
Reply by Pawan Kumar

शाकाहारी स्वागत-भोजपुरी कविता

पाहुन जी चली मुँह हाथ धोइ गोड़ सोड़ पोंछी राउवे खातिर बनवले बानी करी बरी फुलौरी आ मोछी भात दाल आ तरकारि बा आलू कटहल के आम के चटनी भुजिया च…

Started by Mohit mishra

2 Mar 27, 2016
Reply by Mohit mishra

होली में (ग़ज़ल)

2122 1212 22 थम गइल बा किचाल होली में हर तरफ बा बवाल होली में बूढ़, लइका,जवान,मेहरारू सबके बदलल बा चाल होली में बाटे के दोस्त अउर के दुश्…

Started by जयनित कुमार मेहता

1 Mar 25, 2016
Reply by Shyam Narain Verma

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दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
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रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
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समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
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धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
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