आदरणीय काव्य-रसिको !
सादर अभिवादन !!
’चित्र से काव्य तक’ छन्दोत्सव का यह एक सौ पचहत्तरवाँ आयोजन है।
.
छंद का नाम - सरसी छंद
आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -
24 जनवरी’ 26 दिन शनिवार से
25 जनवरी’ 26 दिन रविवार तक
केवल मौलिक एवं अप्रकाशित रचनाएँ ही स्वीकार की जाएँगीं.
सरसी छंद के मूलभूत नियमों के लिए यहाँ क्लिक करें
जैसा कि विदित है, कई-एक छंद के विधानों की मूलभूत जानकारियाँ इसी पटल के भारतीय छन्द विधान समूह में मिल सकती हैं.
***************************
आयोजन सम्बन्धी नोट :
फिलहाल Reply Box बंद रहेगा जो आयोजन हेतु निर्धारित तिथियाँ -
24 जनवरी’ 26 दिन शनिवार से 25 जनवरी’ 26 दिन रविवार तक रचनाएँ तथा टिप्पणियाँ प्रस्तुत की जा सकती हैं।
अति आवश्यक सूचना :
छंदोत्सव के सम्बन्ध मे किसी तरह की जानकारी हेतु नीचे दिये लिंक पर पूछताछ की जा सकती है ...
"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के सम्बन्ध मे पूछताछ
"ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" के पिछ्ले अंकों को यहाँ पढ़ें ...
विशेष : यदि आप अभी तक www.openbooksonline.com परिवार से नहीं जुड़ सके है तो यहाँ क्लिक कर प्रथम बार sign up कर लें.
मंच संचालक
सौरभ पाण्डेय
(सदस्य प्रबंधन समूह)
ओपन बुक्स ऑनलाइन डॉट कॉम
Tags:
Replies are closed for this discussion.
आदरणीय चेतन प्रकाश जी, आपकी प्रस्तुति का स्वागत है.
मौसम बदला नहीं जरा सा, बदल गया आहार .. प्रदत्त चित्र के अनुसार मकरसंक्रान्ति आपकी प्रस्तुति में उभर कर आयी है.
वस्तुतः छंदों के चरणों में मात्रिकता को निबाहने के साथ-साथ अंतरगेयता को भी साधना होता है. आपको भी अवश्य प्रतीत होता होगा, इस पर आपको तनिक और अभ्यास की आवश्यकता बनती है. इसी तरह आपने संस्कार की आपने छः मात्राएँ ली हैं> परन्तु हिन्दी भाषा में संयुक्ताक्षर की गणना वाचिक परम्परा की भाषाओं के अनुसार नहीं होती. इस हिसाब से इस शब्द की कुल मात्रा पाँच ही होगी.
आपकी संलग्नता और आपके प्रयासों के हम मुरीद हैं, आदरणीय
शुभ-शुभ
सरसी छंद
*
माह जनवरी आए अबकी, एक साथ दो पर्व।
उनकी ख़ुशी मनाता भारत, देश हमारा सर्व।
प्रथम मकर संक्राति मनाया, दौड़े लिए पतंग।
और पंचमी ऋतु बसंत हम, रहे उड़ाते रंग।।
एक चित्र हैं खींचा जिसका, कैसे करें बखान।
समझ न आता कौन-कौन से, गिनवाएँ पकवान।
तिल गुड़ के लड्डू, लैया हैं, चिक्की औ’ दधि भात।
इतने हैं पकवान कि समझो, थाली बनी परात।।
#
~ मौलिक/ अप्रकाशित.
एक चित्र हैं खींचा जिसका, कैसे करें बखान।
समझ न आता कौन-कौन से, गिनवाएँ पकवान।//वाह...सरसी छंद पर बहुत सुन्दर सृजन..बधाई आदरणीय अशोक जी
आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रदत्त चित्र पर सरसी छंद की मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. सादर
आदरणीय अशोक भाई साहब, आपकी प्रस्तुति का कमाल, कि इसने कम ही में खूब दम दिखाया है.
प्रथम मकर संक्राति मनाया, दौड़े लिए पतंग।
और पंचमी ऋतु बसंत हम, रहे उड़ाते रंग।। ... बिल्कुल .. सही बात .
परन्तु, किसी एक की ही चर्चा हो सकती थी न ! ... :-))
एक सहज और शुद्ध रचना के लिए हार्दिक धन्यवाद
शुभ-शुभ
आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत सरसी छंदों की सराहना के लिए आपका हृदय से आभार. मैं चित्र को लेकर कुछ असमंजस में था. इस कारण दोनों पर्वों को छंद में स्थान देना पडा और यही कारण है कि द्वितीय छंद को सीधे चित्र पर आधारित करना पडा. सादर.
आदरणीय अशोक भाईजी
आपने जनवरी मास के दो प्रमुख त्योहारों को छंद में सुंदर आबद्ध किया है । हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।
आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदयतल से आभार. सादर
लड्डू चिवड़ा रेवड़ियों से,सजा हुआ है थाल।
वाह वाह ! ..
प्रदत्त चित्र का सपाटपन भी आपकी रचना के रंग को खिलने से न रोक पाया, आदरणीया प्रतिभाजी.
आयोजन में इस प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई .
शुभ-शुभ
.
आदरणीया प्रतिभाजी
हार्दिक बधाई इस प्रस्तुति के लिए।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई।
आदरणीय अखिलेश जी
प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार
आवश्यक सूचना:-
1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे
2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |
3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |
4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)
5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |
© 2026 Created by Admin.
Powered by
महत्वपूर्ण लिंक्स :- ग़ज़ल की कक्षा ग़ज़ल की बातें ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ रदीफ़ काफ़िया बहर परिचय और मात्रा गणना बहर के भेद व तकतीअ
ओपन बुक्स ऑनलाइन डाट कॉम साहित्यकारों व पाठकों का एक साझा मंच है, इस मंच पर प्रकाशित सभी लेख, रचनाएँ और विचार उनकी निजी सम्पत्ति हैं जिससे सहमत होना ओबीओ प्रबन्धन के लिये आवश्यक नहीं है | लेखक या प्रबन्धन की अनुमति के बिना ओबीओ पर प्रकाशित सामग्रियों का किसी भी रूप में प्रयोग करना वर्जित है |