For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अलका 'कृष्णांशी'
  • Female
  • New Delhi
  • India
Share

अलका 'कृष्णांशी''s Friends

  • KALPANA BHATT ('रौनक़')
  • jaan' gorakhpuri
  • Abha saxena
  • rajesh kumari
 

अलका 'कृष्णांशी''s Page

Latest Activity


AMOM
Abha saxena and अलका 'कृष्णांशी' are now friends
Jun 4
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...//अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी ,नमस्कार ,उत्साहवर्धन करती टिप्पणी के लिए  धन्यवाद ।सादर।"
Feb 8
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...//अलका 'कृष्णांशी'
"हार्दिक बधाई..."
Feb 6
अलका 'कृष्णांशी' posted a blog post

चुनावी हवा सरसराने लगी है...//अलका 'कृष्णांशी'

122 122 122 122.सियासत बिसातें बिछाने लगी है चुनावी हवा सरसराने लगी है....जगा फिर से मुद्दा ये पूजा घरों का दिलों में ये नफरत बढ़ाने लगी है। चुनावी हवा......यहाँ बाँट डाला है रंगो में मजहब बगावत की आंधी सताने लगी है।.कहीं नाम चंदन कहीं चाँद दिखता ये लाशें जमीं पर बिछाने लगी है.नही बात होती है अब एकता कीहमारी उमीदें घटाने लगी है .क्युँ इन्सां हुआ जानवर से भी बदतरहमें शर्म ख़ुद से ही आने लगी है .ये क्यों मौन बैठे है आदर्शवादी के मिट्टी वतन की बुलाने लगी है .जहाँ झूठे वादों का बहता है दरिया जमीं बोझ…See More
Feb 5
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"जी सर अब सही है... मुझे नहीं सूझ रहा था, अभी एडिट करती हूँ। मार्गदर्शन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय Samar Kabeer  ji ...... सादर।"
Feb 4
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय नादिर खान जी ,नमस्कार ,उत्साहवर्धन करती टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद । क्युँ का क्यूँ हो गया टाइपिंग मिस्टेक है सुधार करती हूँ। सादर।"
Feb 4
Samar kabeer commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आपने जो मिसरे लिखे हैं वो लय में नहीं हैं,इन मिसरों को यूँ कर सकती हैं:- 'हमारी उमीदें घटाने लगी है' 'हमें शर्म ख़ुद से ही आने लगी है'"
Feb 4
नादिर ख़ान commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"अदरणीया अल्का जी उम्दा गज़ल के लिए बधाई स्वीकारें  ... 6 वें शेर में  क्यूँ इन्सां 122 नहीं हो सकता  और  शर्म खाने के विषय में आदरणीय समर साहब पहले ही बता  चुकें है..... फिर प्रयास कीजिये शुभकामनाओं के साथ…"
Feb 4
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
""इंसानियत को शर्म आने लगी है"वैसे इसमें मुझे लय गड़बड़ लग रही है"
Feb 4
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय Samar Kabeer ji  ,नमस्कार , प्रयास को समय देने व् मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार ।"उम्मीद अम्न की ये घटाने लगी है " "इंसानियत को शर्म आने लगी है" यदि अब सही हो तो एडिट किया जाए ?.... .सादर।"
Feb 4
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी ,नमस्कार ,उत्साहवर्धन करती टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद ।सादर।"
Feb 4
अलका 'कृष्णांशी' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीय Mohammed Arif ji  ,नमस्कार ,उत्साहवर्धन करती टिप्पणी के लिए हार्दिक धन्यवाद आपने सही कहा, पहले भी सियासत ने ही देश के टुकड़े किये थे आज भी वही चल रहा है आम जनता की उम्मीदें सिर्फ भटक रहीं हैं इस पार्टी से उस पार्टी तक।सादर।"
Feb 4
Samar kabeer commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"अलका जी आदाब,ग़ज़ल नुमा गीत का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । 'उम्मीदें अमन की घटाने लगी है' इस मिसरे में सही शब्द है "अम्न" 'के इंसानियत शर्म खाने लगी है' इस मिसरे में 'शर्म खाने' का प्रयोग सही नहीं…"
Feb 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आद0 अलका जी सादर अभिवादन।आज के संदर्भ में बेहतरीन रचना, इस प्रस्तुति पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें"
Feb 4
Mohammed Arif commented on अलका 'कृष्णांशी''s blog post चुनावी हवा सरसराने लगी है...गीत//अलका 'कृष्णांशी'
"आदरणीया अलका जी आदाब,                         बहुत कटाक्षपूर्ण गीत । हर पंक्ति में तीक्ष्णता का समावेश । आज हर भारतीय के मन में आक्रोश है । गंदी सियासत ने सबकुछ तबाह कर दिया है । दुष्ट…"
Feb 3
अलका 'कृष्णांशी' posted a blog post

चुनावी हवा सरसराने लगी है...//अलका 'कृष्णांशी'

122 122 122 122.सियासत बिसातें बिछाने लगी है चुनावी हवा सरसराने लगी है....जगा फिर से मुद्दा ये पूजा घरों का दिलों में ये नफरत बढ़ाने लगी है। चुनावी हवा......यहाँ बाँट डाला है रंगो में मजहब बगावत की आंधी सताने लगी है।.कहीं नाम चंदन कहीं चाँद दिखता ये लाशें जमीं पर बिछाने लगी है.नही बात होती है अब एकता कीहमारी उमीदें घटाने लगी है .क्युँ इन्सां हुआ जानवर से भी बदतरहमें शर्म ख़ुद से ही आने लगी है .ये क्यों मौन बैठे है आदर्शवादी के मिट्टी वतन की बुलाने लगी है .जहाँ झूठे वादों का बहता है दरिया जमीं बोझ…See More
Feb 3

Profile Information

Gender
Female
City State
New Delhi
Native Place
New Delhi
Profession
house wife

अलका 'कृष्णांशी''s Blog

चुनावी हवा सरसराने लगी है...//अलका 'कृष्णांशी'

122 122 122 122

.

सियासत बिसातें बिछाने लगी है

चुनावी हवा सरसराने लगी है...

.

जगा फिर से मुद्दा ये पूजा घरों का

दिलों में ये नफरत बढ़ाने लगी है।

चुनावी हवा.....

.

यहाँ बाँट डाला है रंगो में मजहब

बगावत की आंधी सताने लगी है।

.

कहीं नाम चंदन कहीं चाँद दिखता

ये लाशें जमीं पर बिछाने लगी है

.

नही बात होती है अब एकता की

हमारी उमीदें घटाने लगी है

.

क्युँ इन्सां हुआ जानवर से भी…

Continue

Posted on February 3, 2018 at 10:30am — 13 Comments

आज़ादी के बाद सभी को, देश बनाना होता है..../ अलका 'कृष्णांशी'

छन्द- तांटक

जात धरम और ऊँच नीच का, भेद मिटाना होता है

आज़ादी के बाद सभी को, देश बनाना होता है

कैसी ये आज़ादी है औ, क्या हम सब ने पाया है

तहस नहस कर डाला सब कुछ ,दिल में जहर उगाया है

फुटपाथों पर फ़टे कम्बलों, में जब बचपन रोता है

तब प्रगति के आसमान की ,धुँध में सब कुछ खोता है

आज़ादी के बाद सभी को, देश बनाना होता है

क्या किसान औ क्या जवान है, सबकी हालत खस्ता है

टैक्स भरें भूखे मर जाएँ ,क्या ये ही इक रस्ता है

बीमारी…

Continue

Posted on January 23, 2018 at 12:54am — 8 Comments

जला पुतला सभी ने पाप की कर दी विदाई है//अलका 'कृष्णांशी'

1222 1222 1222 1222 

.

हमारे सामने सबने कसम गीता की खाई है

जला पुतला सभी ने पाप की कर दी विदाई है

.

सभी ये बेटियाँ बहनें सुरक्षित आज से होंगी

अजी रावण की रावण ने यहां कर दी पिटाई है

.

बड़ी बातें सभी करते नही है राम कोई भी

कहीं हिन्दू कहीं सिख है यहाँ कोई ईसाई है

.

न होती धर्म की सेवा न है संस्कार से नाता

दया बसती नही दिल में दिखावे की भलाई है

.

लगाकर हाथ आँचल को वहीं खींसे…

Continue

Posted on October 1, 2017 at 1:00pm — 12 Comments

श्राद्ध.....लघुकथा..../अलका 'कृष्णांशी'

श्राद्ध

" पर....? हर बार तो आनंद ही ..." दूसरी तरफ की कड़क आवाज़ में बात अधूरी ही रह गई

"जी ,जैसा आप ठीक समझें ,पैरी पै..." बात पूरी होने से पहले ही दूसरी तरफ से मोबाइल कट गया ....

रुआंसी सी प्राप्ति सोफे में ही धंस गई , बंद आँखों से अश्क बह निकले

"८ बरसों में जड़ें भी मिटटी पकड़ चुकी थी ......"

"पर आंगन को फूल देना कितना जरूरी है ये एहसास देवरानी के बेटा पैदा होने के बाद हुआ ....."

"नर्म हवाओं ने तूफान बन कर सब रौंदते हुए रुख जब आनंद की ओर किया तो आनंद…

Continue

Posted on September 19, 2017 at 4:51pm — 6 Comments

Comment Wall (1 comment)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:48pm on August 11, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

भारतीय छंद विधान से सम्बंधित जानकारी  यहाँ उपलब्ध है

|

|

|

|

|

|

|

|

आप अपनी मौलिक व अप्रकाशित रचनाएँ यहाँ पोस्ट (क्लिक करें) कर सकते है.

और अधिक जानकारी के लिए कृपया नियम अवश्य देखें.

ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतुयहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

 

ओबीओ पर प्रतिमाह आयोजित होने वाले लाइव महोत्सवछंदोत्सवतरही मुशायरा व  लघुकथा गोष्ठी में आप सहभागिता निभाएंगे तो हमें ख़ुशी होगी. इस सन्देश को पढने के लिए आपका धन्यवाद.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Gurpreet Singh commented on Manan Kumar singh's blog post गजल(उजाले..लुभाने लगे हैं)
15 minutes ago
vijay nikore posted a blog post

प्रिय भाई डा० रामदरश मिश्र जी

आज १५ अगस्त... कई दिनों से प्रतीक्षा रही इस दिन की ... डा० रामदरश मिश्र जी का जन्म दिवस जो है । आज…See More
21 minutes ago
dandpani nahak posted a blog post

जब क़सम हिंदुस्तान की है

जब क़सम हिंदुस्तान की है फिक्र फिर किसे जान की है फ़लक है समूचा तिरंगा यही बात तो शान की है ज़माने…See More
24 minutes ago
Sheikh Shahzad Usmani posted a blog post

"आया ...आया ... गया!" (लघुकथा)

"लो! एक और गया! .. बह गया बेचारा!" "वो देखो! एक तो अब आ गया न!" आशावादी दृष्टिकोण वाले युवक ने तेज…See More
25 minutes ago
Mohammed Arif commented on Dr. Vijai Shanker's blog post टकराव — डॉo विजय शंकर
"आदरणीय विजय शंकर जी आदाब,                    …"
1 hour ago
Mohammed Arif commented on Sushil Sarna's blog post स्वतंत्रता दिवस पर ३ रचनाएं :
"आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,                    …"
1 hour ago
Ajay Kumar Sharma commented on Ajay Kumar Sharma's blog post मन में ही हार, जीत मन में..
"आदरणीया नीलम जी एवं आदरणीया बबिता जी हार्दिक धन्यवाद..."
2 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बेहतरीन गजल के लिए ढेरों हार्दिक बधाई ..."
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on बसंत कुमार शर्मा's blog post गजल- कब यहाँ पर प्यार की बातें हुईं
"आ. भाई बसंत जी, उम्दा गजल हुयी है । हार्दिक बधाई ।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Harihar Jha's blog post झूमता सावन
"आ. हरिहर जी, सुंदर रचना हुयी है । हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Nilesh Shevgaonkar's blog post ग़ज़ल नूर की - रफ़्ता रफ़्ता अपनी मंज़िल से जुदा होते गए
"आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन गजल हुयी है , हार्दिक बधाई।"
3 hours ago
नादिर ख़ान commented on Naveen Mani Tripathi's blog post ग़ज़ल
"बड़ी उम्मीद थी उनसे वतन को शाद रक्खेंगे ।खबर क्या थी चमन में वो सितम आबाद रक्खेंगे ।। है पापी पेट…"
14 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service