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Rachna Bhatia
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"221     2121   1221   212  झूठों का साथ देने से इंकार भी नहीं है सच कि लोग इतने वफ़ादार भी नहीं हासिल इमान से न हमें यारो कुछ हुआ  बाज़ार में तो इसका ख़रीदार भी नहीं इंसान ग़लतियों का है पुतला सही मगर यह बात मानने को…"
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय अत्यंत आभारी हूँ "
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय समर कबीर जी ग़ज़ल तक आने तथा अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए आपकी अत्यंत आभारी हूँ । जी क्या ऊला को हल्की हो गई खुशबू देखो इश्क़े फूलों की   कर सकते हैं "
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Rachna Bhatia replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-110
"आदरणीय  एडिट करते हुए गलती हो गई है ।तीसरे में इश्क़ के फूलों     और गिरह में रश्क लिखना था। प्लीज़ इसे ध्यान दें । जल्दबाजी के लिए माफ़ी चाहूँगी ।"
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"    212 1222 212 1222 चटपटी छपें ख़बरें खूब अब रिसालों में झूठ भी दिखे है सच आ के इनकी चालों में   रिश्ते सारे मतलब के होते फिर अलग ऐसे  जैसे कोई हो पत्थर काली पीली दालों में  हल्की हो गई खुशबू देखो इश्क़ के फूलों…"
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"आदरणीय नादिर ख़ान जी बहुत अच्छी प्रस्तुति ।बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 23

Profile Information

Gender
Female
City State
Delhi
Native Place
Delhi
Profession
Teacher
About me
nothing special... just start my journey ....

Rachna Bhatia's Blog

ग़ज़ल

212 1212 1212 1212



सिर पे पांव रख हमारे,चढ़ रहे हो सीढ़ियाँ

फैंक दलदलों में यार,मांगते हो माफियाँ



जिंदगी में देख लीं,बहुत सी हमने आंधियाँ

खत्म हो चुके हैं अश्क,बंद सी हैं सिस्कियाँ



दास्ताने जिंदगी, सुना सके न हम कभी

दर खुदा के आ खड़े,ले चंद हम भी अर्जि़याँ



छा रही है तीरगी,न रोशनी दिखे कहीं

मौत है बुला रही,दे जिंदगी भी धमकियाँ



चापलूसी बोलती,न महनतों का मोल है

लग रही जगह जगह, इमान की ही बोलियाँ



साथ छोड़ चल… Continue

Posted on June 10, 2019 at 7:55pm — 5 Comments

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