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Shaikh Zubair
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एक ग़ज़ल । हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा

फाइलुन फाइलुन फाइलुन2 1 2 ,2 1 2 , 2 1 2हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा,काम आई तेरी बद-दुआ ।इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,यार मुझ को न तू आज़मा।रात भर जागता रहता है,चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।आखरी बार मुझ से मिलो ,आखरी बार है इल्तिजा ।अब नही देखता तुझ को मैं,रायगाँ है सवरना तेरा ।- शेख ज़ुबैर अहमदमौलिक एवं अप्रकाशितSee More
Aug 22, 2019
Shaikh Zubair posted a blog post

एक ग़ज़ल । हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा

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Aug 15, 2019
Shaikh Zubair commented on Samar kabeer's blog post एक मुश्किल बह्र,"बह्र-ए-वाफ़िर मुरब्बा सालिम" में एक ग़ज़ल
"वाह, बहुत ख़ूब, मोहतरम समर कबीर सर पढ़ कर दिल ख़श हो गया"
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Shaikh Zubair posted a blog post

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2मुहब्बत हो गई तो ?क़यामत हो गई तो ?सनम तू पास मत आ,मुसीबत हो गई तो ?कहानी पढ़ रहा हूँ ,हक़ीक़त हो गई तो ?मुझे तुम फ़ोन करना,इबादत हो गई तो ।सिपाही मैं अकेला ,बग़ावत हो गई तो ?खुदा तेरे जहाँ से ,शिकायत हो गई तो?- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशितSee More
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Shaikh Zubair replied to Admin's discussion खुशियाँ और गम, ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार के संग...
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ग़ज़ल की कक्षा

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May 29, 2019
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May 29, 2019

Profile Information

Gender
Male
City State
Nandurbar
Native Place
Nandurbar
Profession
Student
About me
Talib e ilm,Urdu/Hindi shayari me dilchaspi hain

Shaikh Zubair's Blog

एक ग़ज़ल । हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा

फाइलुन फाइलुन फाइलुन
2 1 2 ,2 1 2 , 2 1 2

हम हैं नाकाम ऐ हम-नवा,
काम आई तेरी बद-दुआ ।

इश्क़ की है अभी इब्तिदा ,
यार मुझ को न तू आज़मा।

रात भर जागता रहता है,
चाँद क्यों इतना है ग़म-ज़दा ।

आखरी बार मुझ से मिलो ,
आखरी बार है इल्तिजा ।

अब नही देखता तुझ को मैं,
रायगाँ है सवरना तेरा ।
- शेख ज़ुबैर अहमद

मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on August 15, 2019 at 12:54pm

ग़ज़ल

फ़ऊलुन फ़ाइलातुन 1 2 2 2 1 2 2

मुहब्बत हो गई तो ?
क़यामत हो गई तो ?
सनम तू पास मत आ,
मुसीबत हो गई तो ?
कहानी पढ़ रहा हूँ ,
हक़ीक़त हो गई तो ?
मुझे तुम फ़ोन करना,
इबादत हो गई तो ।
सिपाही मैं अकेला ,
बग़ावत हो गई तो ?
खुदा तेरे जहाँ से ,
शिकायत हो गई तो?
- शेख़ ज़ुबैर अहमद मौलिक एवं अप्रकाशित

Posted on June 12, 2019 at 1:41am — 3 Comments

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