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Swastik Sawhney
  • Male
  • Meerut, UP
  • India
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Samar kabeer commented on Swastik Sawhney's blog post अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)
"जनाब स्वस्तिक जी आदाब,अच्छी कविता लिखी आपने,बधाई स्वीकार करें ।"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Swastik Sawhney's blog post अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)
"आ. स्वस्तिक जी, समसामयिक विषय पर सारगर्भित रचना हुई है । हार्दिक बधाई।"
Dec 4
Swastik Sawhney commented on Swastik Sawhney's blog post अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)
"आदरणीय सुरेंद्र जी, यह मेरी हिंदी भाषा में द्वितीय किन्तु इस मंच पर प्रथम कविता है। अपनी इस कविता पर आपके द्वारा मिली सकारात्मक टिप्पणी से मुझे प्रोत्साहन प्राप्त हुआ है। हृदय से आपका आभार सर।"
Dec 4
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on Swastik Sawhney's blog post अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)
"आद0 स्वस्तिक जी सादर अभिवादन। बढ़िया समसामयिक विषय को संदर्भित कर भाव पूर्व सृजन किया है आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।"
Dec 3
Swastik Sawhney posted a blog post

अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)

कैसे दे दी हामी तेरे ज़मीर ने?कैसे हो पायी इतनी दरिंदगी हावी तुझ पर?कि चीख पड़ी इंसानियत भी सुन,और शर्मिंदा हो गई हैवानियत भी देख।क्या नहीं दहला तेरा अंतर्मन देख उसको छटपटाता?क्या नहीं काँपी तेरी काया सुन उसकी चीखें?क्या नहीं रोयी तेरी रूह कर उसे राख़?क्या नहीं था ख़ौफ रब-ए-जलील का?कब तक शर्मसार करेगा अपने जन्मदाता को?कब तक अपमानित करेगा राखी के उस वचन को?कब तक ज़लील करेगा रिशतों के पवित्र बन्धनों को?कब तक, आखिर कब तक?जान और समझ ले तू,कि ये नाज़ुक और ख़ूबसूरत जिस्म,अब न सहेंगे तेरा वहशीपन,वो दिन…See More
Dec 2
Swastik Sawhney replied to Swastik Sawhney's discussion Let's Work for our Soul in the group English Literature
"Dear Swastik Sawhney, Beautiful expression of thoughts in a most empathetic manner. Great going. Wonderful piece of poetry. Congratulations."
Nov 24
Swastik Sawhney added a discussion to the group English Literature
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Let's Work for our Soul

Let's Work for our Soul Deplorable, Devastating, Disheartening their condition was. Garbage, Dirt, Poverty Unfortunate their life was. Irrespective of all odds and pains Surreal, Sublime, Satisfying Their smiles were, Inwards & outwards visible with Joyful, delighted, happy faces In the wait of distributions. My heart full of sense of gratitude Overflowed with humanity & humbleness Stood there, passing eatables Felt, as if they were not just grains But lot more than that. Wondering.. !…See More
Nov 21
Swastik Sawhney joined Admin's group
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English Literature

You can write English literature in this Group.See More
Nov 20
Swastik Sawhney updated their profile
Nov 20
Swastik Sawhney is now a member of Open Books Online
Nov 20

Profile Information

Gender
Male
City State
Meerut, UP
Native Place
Meerut
Profession
Student
About me
An enthusiastic teenager exploring and enhancing my creative writing skills through the strongest formula of ever learning strategy.

Swastik Sawhney's Blog

अब न मिलेगी शह तुझे। (अतुकांत कविता)

कैसे दे दी हामी तेरे ज़मीर ने?

कैसे हो पायी इतनी दरिंदगी हावी तुझ पर?

कि चीख पड़ी इंसानियत भी सुन,

और शर्मिंदा हो गई हैवानियत भी देख।

क्या नहीं दहला तेरा अंतर्मन देख उसको छटपटाता?

क्या नहीं काँपी तेरी काया सुन उसकी चीखें?

क्या नहीं रोयी तेरी रूह कर उसे राख़?

क्या नहीं था ख़ौफ रब-ए-जलील का?

कब तक शर्मसार करेगा अपने जन्मदाता को?

कब तक अपमानित करेगा राखी के उस वचन को?

कब तक ज़लील करेगा रिशतों के पवित्र बन्धनों को?

कब तक, आखिर कब…

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Posted on December 2, 2019 at 11:15am — 5 Comments

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