For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Zohaib
  • Male
  • Amroha, Uttar Pradesh
  • India
Share
 

Zohaib's Page

Latest Activity

Samar kabeer commented on Zohaib's blog post किस कि सुनता है (ग़ज़ल)
"जनाब ज़ोहेब साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई । मतले के दोनों मिसरों में रब्त नहीं है,देखियेगा । कुछ अशआर शिल्प की दृष्टि से कमज़ोर हैं,प्रयासरत रहें,धीरे धीरे आप इसपर क़ाबू पा लेंगे,अध्यन भी आवश्यक है ।"
Sep 13
Zohaib posted a blog post

किस कि सुनता है (ग़ज़ल)

किसकी सुनता है मन की करता है,मुँह में रखता ज़बान-ए-गोया है..हक़ बयानी ही उसका शेवा है, कब उसे ज़िन्दगी की परवा है..मौत पर ये जवाब उसका है, क्या अजब है कि इक तमाशा है..वो जो हर ग़म में इक मसीहा है, कौन जाने कहाँ वो रहता है..क्यूँ ख़्यालों में है अबस मेरे किस ने ज़ोहेब उसको देखा है..??मौलिक एवं अप्रकाशित।See More
Sep 11
Samar kabeer commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (हर धड़कन पर इक आहट)
"जनाब ज़ोहेब साहिब आदाब,ग़ज़ल का अच्छा प्रयास है,बधाई स्वीकार करें ।"
Aug 27
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (हर धड़कन पर इक आहट)
"क्या कहने.....हार्दिक बधाई।"
Aug 27
Sheikh Shahzad Usmani commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल (हर धड़कन पर इक आहट)
"वाह। बहुत बढ़िया पेशकश। हार्दिक बधाई ज़ोहैब साहिब।"
Aug 26
Zohaib posted blog posts
Aug 26
Zohaib posted blog posts
Aug 4
Zohaib commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल
"बहुत बहुत शुक्रिया जनाब समर कबीर साहब, ऐसे ही कर लिया जायेगा।"
Aug 3
Samar kabeer commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल
"//लिये ख़ंजर वो मेरी ताक में हैं// इस मिसरे को यूँ कर लें ऐब निकल जायेगा:- 'लिये ख़ंजर वो देखो ताक में है' //दिखावे की मुहब्बत थी सभी की// इस मिसरे को यूँ कर लें,ऐब निकल जायेगा :  'सभी की थी दिखावे की महब्बत' //जहाँ पर…"
Aug 3
Dr Ashutosh Mishra commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल
"भाई जोहेब जी इस प्रयास के लिए हार्दिक बधाई ...सादर "
Aug 3
Zohaib commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल
"मोहतरम जनाब समर कबीर जी इस्लाह के लिये बेहद मशकूर ओ ममनून हूँ, दरअसल मैं शायरी के अलिफ बे से वाकिफ नही बस शौकिया कुछ कहने की कोशिश करता रहता हूँ और गुनगुना कर देख लेता हूँ कि अटक तो नहीं आ रही। इसके अलावा अब ग़ज़ल की बारीकियां फोरम पर पढ़नी शुरू की हैं…"
Aug 3
Samar kabeer commented on Zohaib's blog post ग़ज़ल
"जनाब ज़ोहेब साहिब आदाब,ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है,बधाई स्वीकार करें । दूसरे शैर में शुतरगुर्बा दोष है । तीसरे,चौथे और पांचवें शैर में तक़ाबुल-ए-रदीफ़ देखें ।"
Aug 3
Zohaib updated their profile
Jun 28
Zohaib replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"ज़ोहेब, ज़ुहैब ये अरेबिक ओरिजिन का नाम है जो ज़हब, ज़ह'बुन (सोना धातु) फैमिली से आता है।"
Jun 28
Zohaib replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"तशककुर जनाब।"
Jun 28
Zohaib replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-96
"जी बेहतर मैं ध्यान रखूंगा अब।"
Jun 28

Profile Information

Gender
Male
City State
Amroha U.P.
Native Place
Amroha
Profession
Unamploid

Zohaib's Blog

किस कि सुनता है (ग़ज़ल)

किसकी सुनता है मन की करता है,

मुँह में रखता ज़बान-ए-गोया है..

हक़ बयानी ही उसका शेवा है,
कब उसे ज़िन्दगी की परवा है..

मौत पर ये जवाब उसका है,
क्या अजब है कि इक तमाशा है..

वो जो हर ग़म में इक मसीहा है,
कौन जाने कहाँ वो रहता है..

क्यूँ ख़्यालों में है अबस मेरे
किस ने ज़ोहेब उसको देखा है..??

मौलिक एवं अप्रकाशित।

Posted on September 11, 2018 at 10:30am — 1 Comment

ग़ज़ल (हर धड़कन पर इक आहट)

हर धड़कन पर इक आहट,
सोचूँ तो हो घबराहट..

यारों उससे पूंछो तो,
क्यूँ है मुझसे उकताहट..

लहजा उसका है शीरीं,
आँखें उसकी कड़वाहट..

मुझसे इतनी दूरी क्यूँ,
हर लम्हा है झुंझलाहट..

उससे हाले दिल कह कर,
देखी उसकी तिर्याहट..!!

मौलिक एवं अप्रकाशित।

Posted on August 25, 2018 at 8:31pm — 3 Comments

ग़ज़ल

ज़माने की जहालत कम नहीं थी,

इधर अपनी बग़ावत कम नही थी..

लिये ख़ंजर वो देखो ताक में हैं,

हमारी जिस को चाहत कम नहीं थी..

सभी की थी दिखावे की मुहब्बत,

दिलों में वैसे नफ़रत कम नहीं थी..

जहाँ पर ज़िन्दगी की खुशबुएं थी,

उसी महफ़िल में ग़ीबत कम नहीं थी..

हमारे पास रुसवाई की दौलत,

अरे उनकी बदौलत कम नहीं थी..…

Continue

Posted on August 3, 2018 at 3:30am — 5 Comments

ग़ज़ल

किसी ने तेरी सूरत देख ली है,

यही समझो क़यामत देख ली है..

अभी अंजाम-ए-दिल मालूम क्या है,

अजी तुमने तो आफत देख ली है..

कि ईजा हिज्र की देखी कहाँ थी,

फ़क़त तेरी बदौलत देख ली है..

चुराता है वो काफ़िर आँख मुझसे,

निगाह-ए-चश्म-ए-हसरत देख ली है..

शराफत आज हमने तर्क कर दी,

ज़माने की शराफत देख ली है..

ज़रा शिकवा किया था आज उनसे,

अरे उल्टी नदामत देख ली है..

संभल जाओ मियां ज़ोहेब तुम भी,…

Continue

Posted on August 3, 2018 at 3:30am

Comment Wall

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

  • No comments yet!
 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

डॉ छोटेलाल सिंह commented on Samar kabeer's blog post "बहुत दिनों से है बाक़ी ये काम करता चलूँ"
"परमादरणीय समर साहब आपकी काबिलियत को नमन आपकी कारयित्री …"
36 minutes ago
डॉ छोटेलाल सिंह replied to Usha Awasthi's discussion बाल कविता in the group बाल साहित्य
"बहुत ही सुंदर बाल कविता बधाई हो आदरणीया ऊषा अवस्थी …"
44 minutes ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post बीते लम्हों को चलो .....संतोष
"प्रणाम आ. समर साहब,बहुत शुक्रिया!!"
51 minutes ago
santosh khirwadkar commented on santosh khirwadkar's blog post बीते लम्हों को चलो .....संतोष
"बहुत शुक्रिया आ  डॉ. सिंह साहब"
52 minutes ago
Sushil Sarna posted a blog post

हैंगर में टंगे सपने ....

हैंगर में टंगे सपने ....तीर की तरह चुभ जाता है ये माध्यम वर्ग का शब्द और किसी की हैसियत को चीर- चीर…See More
1 hour ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' posted blog posts
1 hour ago
डॉ छोटेलाल सिंह commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post जनहित में
"परमादरणीय समर साहब जी सादर अभिवादन आपके उत्साह वर्धन से लेखन को बल मिला ,आपकी पैनी नजर से कविता…"
2 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत
"आद0 समर साहब सादर प्रणाम। रचना पर आपकी प्रतिक्रिया से गर्वान्वित हूँ। प्रतिक्रिया से रचना को…"
2 hours ago
सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' commented on सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप''s blog post सामाजिक विद्रूपताओं पर गीत
"आद0 समर साहब सादर प्रणाम। रचना पर आपकी उपस्थिति से गर्वान्वित हूँ। सादर आभार आपका। मात्रा गड़बड़ है,…"
2 hours ago
Samar kabeer commented on डॉ छोटेलाल सिंह's blog post जनहित में
"जनाब डॉ.छोटेलाल सिंह जी आदाब,अच्छा सन्देश दे रही है आपकी रचना,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें…"
2 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ मुहतरम समर कबीर साहब"
3 hours ago
विनय कुमार commented on विनय कुमार's blog post परवाह- लघुकथा
"बहुत बहुत आभार आ नीलम उपाध्याय जी"
3 hours ago

© 2018   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service