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Bhasker Agrawal's Blog – January 2011 Archive (9)

वो लाचार जिंदगी

घबरा जाता हूँ में

जब वो दिन याद आते हैं

पीड़ा के वो पल

टूट कर बिखर गया था में जब

वो रोज आँखें नम होना

वो हर हर बात पर आने वाली सिसकी

वो फूंक फूंक कर क़दमों को बढ़ाना

वो लाचार जिंदगी

 

रास्ते में पड़ा पत्थर जिसकी तकदीर का कोई पता नहीं

जाने कब कोई ठोकर मारकर आगे चल पड़े

जैसे उसका कोई वजूद ही नहीं

अपने अंजाम से बेखबर

 

वो छोटी छोटी चीज़ों का ध्यान रखना

वो बिस्तर पर पड़े रहकर रोज सोचते…

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Added by Bhasker Agrawal on January 22, 2011 at 3:16pm — 2 Comments

महानता

आज एक सवाल आया के दुनिया में कोन बड़ा कहलाता है? किसको लोग महान कहते हैं?



इन सब से पहले कुछ बातें समझना जरूरी है, ये सब समझ लें तो आगे की बात को समझना आसान हो जायेगा

ये सच है के इस संसार में हर चीज़ स्थिर होना चाहती है, सो मनुष्य भी इस नियम के अन्तरगत आता है

मगर मनुष्य के पास एक ऐसी चीज़ है जो उसे स्थिर रहने नहीं देती, और वो है उसकी… Continue

Added by Bhasker Agrawal on January 18, 2011 at 11:50am — No Comments

भ्रम

नशे में है जो इंसान उसकी बात पे क्या हेरान हो

झूठ ही तो है खेल सब, झूठ से क्यों परेशान हो



जो शान है तेरी ओरों से,उस शान में कैसी शान हो

खतरे में है जादूगरी उसकी, तोते में जिसकी जान हो



कदर न करता तुम्हारी जो, उसी के तुम कदरदान हो

इत्तफाक की बात है सारी, वरना कैसे कोई महान हो



रूकती नहीं है जुबान उसकी, दिल में जिसके तूफ़ान हो

शब्द ऐसे बज रहे हैं तेरे, जैसे छेड़ी किसी ने तान हो



होता है पाक शाकिर वो, खो गया जिसका मान हो

वरना तुम शाकिर नहीं, नए… Continue

Added by Bhasker Agrawal on January 17, 2011 at 11:58am — No Comments

सफ़र

बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला

आखिर में था न कोई शिकवा न कोई था गिला

बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला



कभी रस्ते में सताया इस भीड़ ने

गिरे भी तो उठाया इस भीड़ ने

यों ही चलता रहा सिलसिला

पता ही न चला ..



बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला



जागते थे रात भर उजाले की चाह में

वो सपने ही सहारे थे उस राह में

यों ही एक दिन मिल गया शिखर पता ही न चला



बातों बातों में कट गया सफ़र पता ही न चला …

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Added by Bhasker Agrawal on January 15, 2011 at 2:00pm — 2 Comments

धर्म का पालन

में रोज जब घर से निकलता हूँ

तो खुला आसमान दिखता है

जैसे कि वो अपनी अनन्तता में

मेरा स्वागत कर रहा हो,

 

हवाएं मेरे बालों को सहलाती,

पंछी गीत गाते मुझे सुकून देते हैं

जमीन मेरा बोझ उठाकर

मुझे सम्हाले रखती है,

 

ये इनका रोज का नियम है ,

उनका प्रेम है जो, कभी कम नहीं होता

शायद वो अपना धर्म नहीं जानते ,

वरना मुझे छोड़ आपस में ही

वाद विवाद में उलझे होते,

 

या फिर शायद वो अपना…

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Added by Bhasker Agrawal on January 14, 2011 at 10:00am — 5 Comments

असल

चाँद नज़र ना आया तो गम है क्या

सितारों का साथ पाया ये कम है क्या



में तो खुद पे यकीन करता हूँ

नहीं जानता में के भरम है क्या



ना कर तू ज़ाहिर मुझको ख्वाइश अपनी

तेरी जरूरत में शामिल हम है क्या



चाहत मेरी मेरे ख्वाबों में बरसती है

नहीं… Continue

Added by Bhasker Agrawal on January 13, 2011 at 9:56am — 5 Comments

बेकरारी

कभी तो मेरी बेकरारी को देख लो

कहीं वक्त बीत न जाये नज़रें चुराने में

 

सहन होती है तन्हाई जिन्हें और गम नहीं जुदाई का

ऐसे दिलफेंक आशिक कहाँ मिलते हैं ज़माने में

 

मेरी नामोजूदगी को मेरी बेवफाई न समझना

नज़र आएगी मेरी चाहत मेरे बहाने में 

 

रो कर लिपट जाती हो तुम…

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Added by Bhasker Agrawal on January 12, 2011 at 12:11pm — 3 Comments

कश्तियाँ

बहती हैं कश्तियाँ लहरों में
या उन्हें चीर के चली जाती हैं
या किनारे पे खड़ी खड़ी
अकेली मुस्कराती हैं

काश कोई बता देता मुझको
कि ये लहरें कहाँ पे जाती हैं
बहाती हुई ये अपने संग सबकुछ
किनारे पर ही क्यों ले आती हैं

लड़ता हूँ जब थक कर में
लहरों कि इन लपटों से
तब ये क्यों तट पर आते ही
खुद ही ठंडी हो जाती हैं

किनारे पे है अंत इनका
किनारे से प्रारंभ है
काश कोई बता देता मझको
के ये बहती हैं या बहाती हैं

Added by Bhasker Agrawal on January 7, 2011 at 8:52pm — 2 Comments

ओ बावरी हँसी मुझे छोड़ो नहीं

ओ बावरी हँसी मुझे छोड़ो नहीं

रह जाओ मेरे संग

मेरी संगनी बनकर

मुझे छोड़ो नहीं



तुम बिन में क्या

एक बेमतलब का खिलौना

आओ खेलो मेरे संग

मुझे छोड़ो नहीं

ओ बावरी हँसी मुझे छोड़ो नहीं



मेरी साँसों के संग तुम चलो

दिल में मेरे तुम धडको

शांति बनकर विराजो मस्तक कमल पर

मुझे छोड़ो नहीं

ओ बावरी हँसी मुझे छोड़ो नहीं



आओ उड़ चलें गगन के पार

वहां घर बसाएंगे

मिलकर कुछ गुल खिलायेंगे

एक बगिया अपनी भी… Continue

Added by Bhasker Agrawal on January 6, 2011 at 6:12pm — 2 Comments

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