For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

AjAy Kumar Bohat's Blog – May 2012 Archive (8)

" फैशन "

कितना कठिन हो जाता है

लिखना

कई बार

'फैशन' के अनुरूप

कैसे साध रखा है हमने

अपने मन को

की वह सोचता है

बिलकुल किसी कंप्यूटर प्रोग्राम की तरह

किस तरह रख पाते हैं हम

अपने मन के भावों को

अनुशासन में

और

वे प्रकट होते हैं

केवल

एक दिवस-विशेष पर...

एक विशेष दिन ही जागता है जज़्बा देश-प्रेम का

या

मातृ-पितृ भक्ति का..

किसी एक दिन ही

आती है

भूली-बिसरी

बहन की याद..

ऐसे ही कई लोग हैं…

Continue

Added by AjAy Kumar Bohat on May 13, 2012 at 9:30pm — 13 Comments

...आरुषि...

मेरी बात को सुन लड़की,

कुछ सपने मत बुन लड़की

सपनो को लगेगा घुन लड़की

मेरी बात को सुन लड़की...



मेरी बात मान लड़की

कुचल अपने अरमान लड़की

राक्षशों को पहचान लड़की

मेरी बात मान लड़की...



मत कर तू प्यार लड़की

ऐतराज़ करेगी 'तलवार' लड़की

बहुत तेज़ है धार लड़की

मत कर तू प्यार लड़की...



चीरती है सब जहां की ख़ामोशी

कौन समझ रहा माँ की ख़ामोशी

ठन्डे पड़े जिस्मोजां की ख़ामोशी

चीरती है सब जहां की ख़ामोशी



मेरी बात को सुन…

Continue

Added by AjAy Kumar Bohat on May 13, 2012 at 9:09pm — 5 Comments

...सिग्रेट...(२)

होठों से छुआ भी…

Continue

Added by AjAy Kumar Bohat on May 13, 2012 at 9:07pm — 11 Comments

" तब और अब "

पहले हँसता था
खुश था
पर लोग दुखी थे
सो करते थे दुखी
अब एक उदासी ओढ़ ली है
और
चुप रहता हूँ
चिपका लिया है दुःख का मुखौटा
पर
अब लोग खुश हैं
दुःख को देख कर
और मैं उनको सुखी देख कर
खुश हूँ 
फर्क इतना है...
पहले अपने ही में खुश था
अब जान लिया है लोगों की ख़ुशी…
Continue

Added by AjAy Kumar Bohat on May 12, 2012 at 8:00pm — 10 Comments

" सिगरेट "

मैं एक जिस्म हूँ
सिर्फ 
एक ठंडा जिस्म
और मेरा
ठंडा बेजान जिस्म
पड़ा है लावारिस
कई जगहों पर
रास्तों में, फुटपाथ पर, कूड़े के ढेर पर,
बसों में, रेलवे-प्लेटफार्म पर 
लोगों की ठोकरों में,
पैरों में आता हुआ
या फिर
मिल जाउंगी सुलगती..
ऐश-ट्रे में
जो सजी है मेज पर
और ... मेज
घर की…
Continue

Added by AjAy Kumar Bohat on May 12, 2012 at 7:44pm — 8 Comments

‎" ए.सी. और प्राइवेसी "

हे ईश्वर 

यह सच है की,

मैंने चाहा 'ए.सी' 

ये भी सच

मैंने माँगी 

'प्राइवेसी' 

हे अंतर्यामी 

रही चाहत मेरी सदैव 

रहूँ मैं लाईम-लाईट में

और

टिका रहे हर वक़्त मुझ पर ही कैमरा

आती रहे निरंतर कानो में

हरे-हरे नोटों के

फड़फड़ाने की आवाज़...

लेकिन

मेरी मुद्दत की तमन्नाओं का

ये क्या तर्जुमा.... मेरे परवरदिगार

आज खड़ा हूँ मैं बन कर

ATM का चौकीदार !!!



~…

Continue

Added by AjAy Kumar Bohat on May 11, 2012 at 9:59pm — 6 Comments

~ कविता के पंछी या पंछियों की कविता ~

थिरक-थिरक
नाचता   मोर ... फिर 
देख  कर
पाँव अपने
हो जाता बोर
---
कुहू कुहू गाती कोयल
मन को मनभाती कोयल
पराये घोंसले में देकर अंडे
कहाँ जाने फुर्र हो जाती कोयल 

© AjAy Kum@r

Added by AjAy Kumar Bohat on May 11, 2012 at 11:56am — 6 Comments

भीड़...अजय कुमार बहोत

मैं
भीड़ हूँ
इस लोकतंत्र के ढाँचे की मैं रीढ़ हूँ
जी हाँ
मैं भीड़ हूँ...

तिनका-तिनका जोड़ता दिन का
रोज़ बिखरता-जुड़ता
मन-आशाओं का नीड़ हूँ
मैं भीड़ हूँ...

कहाँ फुर्सत
वैष्णव-जन को,
की जाने मुझ को
एक परायी पीड़ हूँ
मैं भीड़ हूँ...

~ © AjAy Kum@r

Added by AjAy Kumar Bohat on May 11, 2012 at 11:30am — 10 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
yesterday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"पत्थर पर उगती दूब ============ब्रह्मदत्तजी स्नान-ध्यान-पूजा आदि से निवृत हो कर अभी मुख्य कमरे में…"
Friday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"स्वागतम"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीया रिचा यादव जी नमस्कार बहुत शुक्रिया हौसला अफ़ज़ाई का "
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"क्या गिला गर किसी को भूल गया इश्क़ में जो ख़ुदी को भूल गया अम्न का ख़्वाब देखा तो था पर क्या करुँ रात…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय तिलक राज कपूर जी नमस्कार बहुत- बहुत धन्यवाद आपका आपने समय निकाला ग़ज़ल तक आए और ऐसी बेहतरीन…"
Thursday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-188
"आदरणीय अजय गुप्ता 'अजेय' जी नमस्कार बहुत धन्यवाद आपका आपने समय दिया आपने सहीह फ़रमाया गुणी…"
Thursday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service