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"श्री कृष्ण को समर्पित कुछ दोहे"

सुध-बुध सारी भूल गयी, भूली जान-अजान,
कान्हा ने जब छेड़ दी, मधुर-मुरली की तान.

मुख पर छाए लालिमा, खिले अधर मुस्कान,
कान्हां जी को कैसा लागे राधा-राधा नाम.

जिसके हरी हैं सारथि, निश्चय उसकी जीत,
जिस मन हरी बसें, उस मन प्रीत ही प्रीत.

लाज बचाई आपने, सुन अबला मन की पीर,
अबला अब सबला भयी , छोटो है गयो चीर.

दरस तुमरे पाने को, जुग-जुग जाते बीत,
भाग बढे सुदामा के, जो भये तुम्हारे मीत.

हर युग अवतार लिए, खेले क्या-क्या दांव,
निष्ठा मग्न लक्ष्मी जी, दाबे श्री हरी के पाँव.

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Comment by AjAy Kumar Bohat on August 14, 2012 at 9:13am

हौसला अफजाही का बहुत बहुत शुक्रिया राजेश जी, रेखा जी, सुरेन्द्र कुमार शुक्ला  जी, डा. प्राची जी , सौरभ सर जी, संदीप जी अशोक जी...

Comment by Ashok Kumar Raktale on August 14, 2012 at 8:43am

दरस तुमरे पाने को, जुग-जुग जाते बीत,
भाग बढे सुदामा के, जो भये तुम्हारे मीत.

आदरणीय अजय जी एक से बढ़कर एक दोहे. बधाई.

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on August 11, 2012 at 2:00pm

आदरणीय इस पर्व में कृष्ण भक्ति में डूबे आपको इस पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं
इस प्रयास को बहुत बहुत बधाई
किन्तु दोहों की दृष्टि से इनमे दोष हैजिन्हें गुरुजनों के विचार विमर्श के बाद आप सुधार कर सकते हैं


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 11, 2012 at 9:38am

कृष्णाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ, अजयजी.

दोहों पर हुआ आपका प्रयास सुखकर लगा. बधाई. सतत प्रयासरत रहें.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 10, 2012 at 8:57pm
अजय बोहाट जी, बहुत सुन्दर दोहा प्रयास, कथ्य व माधुर्य बहुत बहुत बढ़िया है, बस शिल्प पर जरा सा और ध्यान दें.
जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाई इस दोहावली के लिए.
Comment by SURENDRA KUMAR SHUKLA BHRAMAR on August 10, 2012 at 12:50pm

जिसके हरी हैं सारथि, निश्चय उसकी जीत, 
जिस मन हरी बसें, उस मन प्रीत ही प्रीत. 

लाज बचाई आपने, सुन अबला मन की पीर, 
अबला अब सबला भयी , छोटो है गयो चीर. 

प्रिय अजय जी जय श्री कृष्णा बहुत सुन्दर  दोहे ...चीर हरण पर सुन्दर व्यंग्य और सन्देश भी 

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाये आप सपरिवार और सारी प्यारी मित्र मण्डली को भी ....
भ्रमर ५ 

 

Comment by Rekha Joshi on August 10, 2012 at 11:51am

जिसके हरी हैं सारथि, निश्चय उसकी जीत, 
जिस मन हरी बसें, उस मन प्रीत ही प्रीत. ,अति सुंदर रचना और कृष्ण जन्माष्टमी पर हार्दिक बधाई अजय जी 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 10, 2012 at 11:18am

वाह बहुत भक्तिमय दोहे कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई 

कृपया ध्यान दे...

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