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DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU''s Blog – May 2018 Archive (1)

पढ़ न पाए ये ज़माना इश्क की तहरीर अब

२१२२ २१२२ २१२२ २१२

पढ़ न पाए ये ज़माना इश्क की तहरीर अब 

इसलिए ही ख़त जलाये औ तेरी तस्वीर अब

मंदिरो-मस्ज़िद में जाकर मिन्नतें-सजदा किये

फिर भी तुमसे दूर रहना है मेरी तक़दीर अब|

लोग कुछ मजनूँ कहें अब और कुछ फ़रहाद भी

यह तुम्हारे इश्क की ही लग रही तासीर अब |

ज़ख़्म गहरा हो गया हो या कि फिर नासूर तो

प्यार का ही लेप उस पर हो दवा अक्सीर अब|

है मुक़द्दर में नही मत सोचकर बैठो मियाँ

बदलेगी तक़दीर निश्चित…

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Added by DR. BAIJNATH SHARMA'MINTU' on May 23, 2018 at 1:30pm — 2 Comments

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