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Prabha Khanna's Blog – June 2011 Archive (6)

ये तेरी ज़द मे रहता है

ये तेरी ज़द मे रहता है , तू अपनी हद मे रहता है ........

परिंदा दिल का कब खींची हुई सरहद मे रहता है ........

सफ़र अब तय नही होता ... चलो अब लौट जाते हैं ........

अगर… Continue

Added by Prabha Khanna on June 28, 2011 at 6:50pm — No Comments

मेरी अपनी

गुलामी की ये कड़ियाँ , हाँ ये कड़ियाँ मेरी अपनी हैं ... सलाखें मेरी अपनी हैं ...........

भले ही बंद हैं आँखें , ये आँखें मेरी अपनी हैं .......



बहारों जैसे मौसम इत्तेफाकन तो नहीं आते , गुलाबों को मसल देने की आदत मेरी अपनी है .......



ज़माने भर की खुशियाँ बाँध कर आँगन में रखो तुम , मिले जो कुछ , गँवा देने …
Continue

Added by Prabha Khanna on June 28, 2011 at 10:30am — No Comments

ज़बां फूलों सी रखता है

ज़बां फूलों सी रखता है ......

अना पत्थर सी रखता है ......

अधूरी दास्तां दिल मे छिपा कर वो भी रखता है ......…





Continue

Added by Prabha Khanna on June 24, 2011 at 7:02pm — 6 Comments

कभी ज़िंदगी से भी मिलो

कभी ज़िंदगी से भी मिलो --



ज़िंदगी ...... किसी क़ीमत पर हारती ही नही --…

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Added by Prabha Khanna on June 22, 2011 at 10:00pm — 4 Comments

कभी मुझे इस दुनिया में रहने का ढब न आएगा ...

कौन किसी के अश्रु पिएगा, कौन घाव सहलाएगा ...

पत्थर दिल वालों की नगरिया में तू धोखा खाएगा ...



माँगेगा दो बोल प्रेम के, तुझे भिखारी समझेंगे ...

जो कुछ… Continue

Added by Prabha Khanna on June 21, 2011 at 9:54am — 9 Comments

मत अभिमान करो ...

मत अभिमान करो ...

समय पक्षधर बना आज,

उसका सम्मान करो ...



कल साँसों की संचित पूँजी चुकने वाली है ...…

Continue

Added by Prabha Khanna on June 20, 2011 at 9:00am — 9 Comments

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