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गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ''s Blog – June 2021 Archive (3)

जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं (135 )

ग़ज़ल( 11212 11212 11212 11212 )
जो नहीं है यार तू पास में तो न रंग-ए-फ़स्ल-ए-बहार हैं
न है बर्ग-ए-गुल न शमीम-ए-गुल मेरी ज़ीस्त में बचे ख़ार हैं
**
तेरे हिज्र से जो मिले हैं ग़म वही दौलतें हैं मेरी सनम
मेरी फ़िक्र का है सबब तो बस ये बढे हुए ग़म-ए-यार हैं
**
मेरे वास्ते है तू नाज़नीं बड़ी दिलनशीं लगे महज़बीं
अरे…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 22, 2021 at 11:30pm — 3 Comments

मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे (134 )

ग़ज़ल ( 1222 1222 1222 1222 )
मुहब्बत की हमारी आख़री मंज़िल तुम्हीं तो थे
सफ़र भी तुम मुसाफ़िर तुम मक़ाम-ए-दिल तुम्हीं तो थे
**
अकेलेपन के साथी हो अभी तक याद में ढलकर
मुसीबत में ख़ुशी में बारहा शामिल तुम्हीं तो थे
**
हथेली की लकीरों को नुज़ूमी को दिखाते क्या
तुम्हीं कल थे हमारा और मुस्तक़्बिल तुम्हीं तो…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 17, 2021 at 8:30pm — 5 Comments

ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी (133 )

ज़ुबान कुछ शिकायती भी कीजिए कभी कभी
निज़ाम से तनातनी भी कीजिए कभी कभी
**
हयात के लिए हैं दोस्त ख़ुश्क़ अश्क पुरख़तर
फुगाँ की रस्म अदायगी भी कीजिए कभी कभी
**
विसाल और हिज्र के मज़े भी हैं जुदा जुदा
सुपुर्द-ए-हिज्र ज़िंदगी भी कीजिए कभी कभी
**
कशीदगी गमों से हम निभा…
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Added by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on June 14, 2021 at 4:00am — 4 Comments

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