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"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |  (५३ )

एक गीत प्रीत का

===========

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

लता के सम लिपट जाना , नखों से पीठ खुजलाना |

अधर से चूम लेना मुख,नयन से कुछ कहा जाना |

कभी पहना दिया हमदम,गले में हार बाहों का

अचानक गोद में लेकर,तुम्हारा केश सहलाना |

हथेली से छुपा लेना, तुम्हारा नैन को मेरे

इशारे प्यार के थे या, शरारत भेद यह खोलो |

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

तुम्हारा डाँटना या फिर ,तुम्हारी झिड़कियाँ मीठी |

ज़रा सी बात पर आँसू , बहाने के बहाने भी |

तुम्हारा हक़ जताना भी ,तुम्हारी ज़िद सभी नखरे

बताओ किस तरह मानूं ,अदाओं की कलाबाज़ी |

बुने जो ख़्वाब थे हमने ,हमारे आशियाने के

प्रिये ! बरखा बिना संभव ,कभी क्या बीज भी बो लो ?

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

कठिन होगा तुम्हारे बिन ,सनम हर हाल में जीना |

जुदाई का हलाहल भी ,बड़ा मुश्किल यहाँ पीना |

तुम्हीं ने डोर बाँधी थी ,तुम्हीं ने तोड़ क्यों डाली ?

अचानक क्यों मुझे जो हक़, दिया था प्रीत का छीना ?

प्रतीक्षारत रहूँगा मैं , अभी तक आस है बाकी

क़सम है लौट आओ तुम ,न जीवन में ज़हर घोलो |

"मुहब्बत की नहीं मुझसे " , प्रिये ! तुम झूठ मत बोलो |

**

गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' बीकानेरी |

१९/०७/२०१९

**

(मौलिक एवं अप्रकाशित )

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Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 25, 2019 at 8:39pm

आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार narendrasinh chauhan साहेब 

Comment by narendrasinh chauhan on July 25, 2019 at 7:21pm

खूब सुंदर रचना सर

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 24, 2019 at 8:44pm

आदरणीया समर कबीर   जी, आपकी स्नेहिल सराहना से उत्साहवर्धन के लिए ह्रदय तल से आभार |

Comment by Samar kabeer on July 24, 2019 at 12:09pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,अच्छा गीत लिखा आपने,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 22, 2019 at 10:37pm

बहुत बहुत आभार Amit Kumar "Amit"  जी उत्साहवर्धन के लिए 

Comment by Amit Kumar "Amit" on July 22, 2019 at 8:21pm

आदरणीय गिरधारी सिंह गहलोत तुरंत बीकानेरी जी एक खूबसूरत गीत कहने के लिए बहुत-बहुत बधाईयां।

Comment by गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत ' on July 21, 2019 at 12:12am

आप सही हैं सर Samar kabeer साहेब ,ये ग़ज़ल रिपीट हो गई थी मैंने डिलीट कर दी है | सादर आभार | 

Comment by Samar kabeer on July 3, 2019 at 3:12pm

जनाब गिरधारी सिंह गहलोत 'तुरंत' जी आदाब,मुझे ऐसा लगता है इस ग़ज़ल को आपने दोबारा पोस्ट किया है? एक बार चेक कर के बताएँ, अपनी टिप्पणी आपके जवाब के बाद दूँगा ।

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