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Subodh kumar's Blog – September 2010 Archive (19)

इंसानियत बगैर इंसान हैं! '' लोग ''

मतलब कठिन शब्दों काः-

1.तुर्बत = कब्र, 2.इख़्तिलात = मेलजोल, 3.इशरत = अहसास,

4.निस्बत = लगाव



ये कितना खुदगर्ज हुआ जरूरत में आदमी

जिस कदर बेखबर रहे तुर्बत1 में आदमी



इख़्तिलात2 किसी से न पेशे खिदमतगारी है

बेखुदी का परस्तिश है वहशत में आदमी



रहे सबको इशरत3 फकत् अपने सांसो की

नहीं सिवा इसके अब फुर्सत में आदमी



काटे सर गैरों की इलत्तिजाये ज़िन्दगी में

करे है दरिंदगी अपने निस्बत4 में आदमी



ढुंढ़े नहीं मिले नियाजे5 अदब वफाये… Continue

Added by Subodh kumar on September 27, 2010 at 2:00pm — 4 Comments

हम कौन से भले हैं....

न सोंच दिल कि तुम्हारी खता कहाँ थी

कर ले ख़्याल इतना हमारी वफा कहाँ थी



भड़कती नहीं चिंगारियां संग और आब से

रंजिश में तेरी भी दिलक़श ब्यां कहाँ थी



गै़र की बदसुलूकी से आज तुं क्यूं परेशां

बेअदबी पर खुद की शर्मो हया कहाँ थी



गै़र की करतुतो पर दिलों में शुगबूगाहट

अपनी ख़ता का दिल में चर्चा कहाँ थी



औरों से चाहत तेरी तमन्ना तहजीब की

ईमानदारी तेरी पेशगी में जवां कहाँ थी



इक वजह अदावत की दुनिया में खुदगर्जी

जब बनी थी कायनात… Continue

Added by Subodh kumar on September 25, 2010 at 4:53pm — 4 Comments

क्या होगी जिन्दगी तेरे बगैर....

न मिलेगा सुकूने दिल सियाह चाहे रोशनी में

खलबली सी फ़कत रहेगी तेरे बगै़र जिऩ्दगी में



तुम से बिछुड़कर हाल हमारा कुछ ऐसा होगा

तेरे तस्सवुर में उम्र कटेगा हर पल बेबसी में



बहारों का क्या फायदा गर एहसास में खि़जा

माहताब भी गर्क हो जाये सबे ता़रीकी में



नजरें दरिचा बन जाये दिल ख़्यालों का मकां

दफ्न हो जाये वजूद तन्हाई के आरसतगी में



ओ रूखसत होने वाले देता जा तदवीर कोई

दिलबस्तगी का बहाना होगा तेरे नामौजुदगी में



मुश्किल से मिलता… Continue

Added by Subodh kumar on September 24, 2010 at 8:00pm — 2 Comments

हाले बेबसी ....

शबनम नहीं बरसते आसमां से आग अब तो

जज़्बों से ब्यां हो दिल के दा़ग अब तो



इतने शौले उमड़ पड़े नाउम्मीदी के आतिश का

जलता नहीं दिल में उम्मीदों के चि़राग अब तो



सोचूँ तो दर्द बोलूँ तो दर्द हरसू दर्द दिखाई दे

काटों की तरह चुभने लगा गुलाब अब तो



जिऩ्दगी से नफरत होने लगी कज़ा से उल्फत

टूटे हुऐ दिल में सजता नहीं है ख़्वाव अब तो



जीने की तमन्ना में हम क्या क्या करते गये

हर सांस मागें जिऩ्दगी का हिसाब अब तो



क्या सोंचा जिन्दगी से… Continue

Added by Subodh kumar on September 22, 2010 at 5:00pm — 5 Comments

कुछ इस कदर वो मुझे चाहती हैं .....???????????

ख़्यालों के तासीर से दिल अपना बहला लेते हैं

कुछ लोग एहसासे बुलंदी से हीं आसूदगी पा लेते हैं


आसूदगी = संतोष



**********************************************************************



फितरते दिलकशी है चेहरे पर नक़ाब उनका

राजे दिल फा़श करे रंगे शबाब उनका



वो न कहें लबों से चाहे कुछ मगर

कहती है बहुत कुछ अंदाजे हिजा़ब उनका



हैं वो भी मुज़्तरिब जितना की दिल मेरा

ये और बात है कहे न कुछ इजि़्तराब उनका

मुज़्तरिब = व्याकुल… Continue

Added by Subodh kumar on September 21, 2010 at 5:30pm — 2 Comments

मुहब्बत : करके भी न कर सके !

खु़दा मेरी दीवानगी का राज फा़श हो जाये

वो हैं मेरी ज़िन्दगी उन्हें एहसास हो जाये



सांसे उधर चलती है धड़कता है दिल मेरा

एक ऐसा दिल उनके भी पास हो जाये



हर मुलाकात के बाद रहे हसरत दीदार की

ऐसे मिले हम दूर वस्ल की प्यास हो जाये



तड़पता है दिल उनके लिये तन्हाई में कितना

बेताबी भरा जज़्बात उधर भी काश हो जाये



तश्नाकामी इस कदर रहे नामौजुदगी में उनकी

जैसे सूखी जमीं को सबनमी तलाश हो जाये



करे तफ़सीर कैसे दिल उल्फत का ब्यां… Continue

Added by Subodh kumar on September 19, 2010 at 9:44pm — 10 Comments

ऐसे जीयो जिन्दगी..........

शरमाये अपनी दास्तां पर ऐसा हाल न हो

नक़्दो - नजर खुद से कोई सवाल न हो



गौर फरमा ऐ दिल कदम उठाने से पहले

कि बाद में तुझको कोई मलाल न हो



करे जुवां दिलकश ब्यां जो खुले यह कभी

टूटे न दिल किसी का जीना मुहाल न हो



न कर नापाक करतूतों से दा़गदारे जिन्दगी

जाने फिर मुस्तकबिल तेरा खुशहाल न हो



सैकड़ों सांसे पास में चंद गमों से न धबरा

क्या फायदा जिन्दगी से जो इस्तेमाल न हो



दे मुकाम जिन्दगी को एक पहचान तुं शरद

वो वजूद कैसा… Continue

Added by Subodh kumar on September 17, 2010 at 4:00pm — 6 Comments

दो शब्द हिन्दी दिवस पर...

दो शब्द हिन्दी दिवस पर: 14 सितम्बर की बधाई



हिम तुल्य शितल, न्याय तुल्य निश्चल, दीप तुल्य उज्जवल

तीन अक्षर का संगम हिन्दी! सुबोध भाव अति निर्मल



अभिन्न भेष-भुषा सस्ंकृति से मान बढ़े लोकप्रियता का

केवल नागरिकता नहीं उचित परिचय राष्ट्रीयता का

भारतीयता का पूर्णतः प्रतीक हिन्दी बोल विशिष्ट विमल



वर्णित भारतीय सविंधान में है प्रस्तावना का प्रालेख

स्वीकृति सम्पूर्ण भारत में हो हिन्दी नियमित उल्लेख

कारण कई उत्तमता का लिपि सहज सरस सरल



गगन… Continue

Added by Subodh kumar on September 14, 2010 at 7:00am — 4 Comments

मेरी चाहत

इस तरह से तेरी मुहब्बत दिल में समाई है

यूं जिन्दगी मेरी है पर तेरी लगे परछाई है



चाहे शमा की रोशनी चाहे नूर आफताब की

बगैर तेरे हरसू ता़रीकी हर जगह सियाही है



दौलत शोहरत आगोश में रहे सियासत दुनिया का

जब तुं नहीं दिल में हर मोड़ पर तन्हाई है



तुझे यकीं हो न शायद है दिल को एहसास मगर

बदले करवट मेरे जज़्बात जब लेती तुं अंगराई है



धड़कन तेरे दम से है बरकरार सांस सीने में

वजूद मेरी निशां तेरी उल्फत की खुदनुमाई है



और क्या कहे शरद… Continue

Added by Subodh kumar on September 12, 2010 at 9:30pm — 2 Comments

Unki yaad mein...

Added by Subodh kumar on September 7, 2010 at 3:09pm — 2 Comments

अंजान हक़ीकत

Added by Subodh kumar on September 4, 2010 at 9:30pm — No Comments

Ru-B-Ru

Added by Subodh kumar on September 4, 2010 at 1:00pm — 2 Comments

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