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मनोज अहसास's Blog – October 2019 Archive (4)

अहसास की ग़ज़ल

1222   1222   1222   1222

मुहब्बत के नगर में आँसुओं के कारखाने है,

यहां रहकर पुराने जन्म के कर्ज़े चुकाने हैं.

सड़क पर आके देखों तो झुलस जाओगे शिद्दत से,

समाचारों में तो इस दौर के मौसम सुहाने हैं.

उतर आया अब आँखों में आंगन में भरा पानी,

मेरी चाहत के अफसाने में पटना के फसाने हैं.

फलक पर चाँद चाहे चौथ का हो या हो पूनम का,

हमें त्यौहार सब परदेस में तन्हा मनाने हैं.

कहाँ पे आके बिगड़ी ये कहानी…

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Added by मनोज अहसास on October 17, 2019 at 8:51pm — 3 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×16

इश्क रुई के जैसा है पर,ग़म से रिश्ता मत कर लेना.

लेकर चलने में आफत हो इतना गिला मत कर लेना.

एक समय ऐसा आता है, सूरज भी मुरझा जाता है,

चार दिनों की गर्दिश में तुम दामन मैला मत कर लेना.

लाख बहाने पास है उसके, अब तो खफा होने के मुझसे,

किंतु मना लेने में उसको अना को रुसवा मत कर लेना.

सबसे अच्छे शब्दों में तुम अपनी बात बता सकते हो,

लेकिन कोई समझ भी लेगा इसका भरोसा मत कर लेना.

व्याकुल माता बचपन से ही बच्चों को…

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Added by मनोज अहसास on October 15, 2019 at 2:01am — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल

1222     1222      122

जमाने भर की बातें सोचता हूँ

मगर मैं खुद में अब कितना बचा हूँ

सुहानी भोर किस्मत में नहीं है

भला मैं रात भर क्यों जागता हूँ

मुहब्बत एक हरजाई का घर है

मैं उस घर से निकाला जा चुका हूँ

तरफदारी से तेरी क्या है हासिल

मैं अपनों में अकेला पड़ गया हूँ

गुजारी जिंदगी सारी जहाँ पर

मैं अब उस शहर में बिल्कुल नया हूँ

तुझे आवाज देने का सबब है

मैं अब तन्हाई से डरने लगा…

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Added by मनोज अहसास on October 13, 2019 at 4:28pm — 4 Comments

अहसास की ग़ज़ल

2×15

चंद मुकम्मल ग़ज़लों से हम दुनिया को बहला देंगे,

और अधूरे मिसरे तेरी यादों का पहरा देंगे.

जो कुछ तेरी इच्छा है वो ही तुझको दिखला देंगे,

हम खुद को धोखे में रखकर प्यार का मोल चुका देंगे.

ऐसे वो अपने चेहरे के सारे दाग छुपा देंगे,

कंप्यूटर से बनी हुई उम्दा तस्वीर दिखा देंगे.

जब तक तेरी आंखों से बरसेगी करुणा की धारा,

तब तक ये दुनिया वाले मेरे अहसास जला देंगे.

कीमत जिन फूलों की दाता के दर पर भी नहीं…

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Added by मनोज अहसास on October 1, 2019 at 12:24am — 4 Comments

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