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Akhand Gahmari's Blog – October 2014 Archive (2)

शिकायत हम करें किससे बता दो जिन्‍दगी मुझको

किया जो प्‍यार का वादा न जाने क्‍यों भुलाती है

अँधेरी रात में हमको नहीं राहें दिखाती है



छलक जाती न जाने क्‍यों कभी भी आँख ये मेरी

न जाती याद उसकी है मुझे हर पल रूलाती है



उसे दिल में बसाने की लिये चाहत मरेंगे क्‍या

बने अंजान वो यारो हमें पागल बताती है



मिले जब वो कभी हमसे बताये हाल दिल का क्‍या

न रहता होश अपना  जब हमें नगमे सुनाती है l



शिकायत हम करें किससे बता दो जिन्‍दगी मुझको

बसी जो दिल में मेरे क्‍यों वही हमको सताती है



अखंड…

Continue

Added by Akhand Gahmari on October 21, 2014 at 8:53pm — No Comments

हमारे पास जो आता

हमारे पास आता जो वही दिल तोड़ जाता है

रहे जलता हमारा दिल मगर वो मुस्‍कुराता है

हमारी जिन्‍दगी में क्‍यों अधेरा ही रहे छाया

मिले न चैन दिल को क्‍यों भटकती है मेरी काया

न कोई दो कदम चल कर हमें जीना सिखाता है

रहे जलता हमारा दिल मगर वो मुस्‍कुराता है

हमारे पास आता जो वही दिल तोड़ जाता है

न नदियों को कभी देखा मिलाते दो किनारो को

बचाते फूल को मैने नहीं देखा बहारो को

जिसे हम खास कहते है वही हमको मिटाता…

Continue

Added by Akhand Gahmari on October 2, 2014 at 10:21am — 6 Comments

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