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Amod shrivastav (bindouri)'s Blog – February 2016 Archive (3)

मेरे महबूब के आमद का जलवा

बहर 1222/1222/1222/1222



मेरे महबूब की आमद का जलवा खूब सूरत है//

जहाँ में रंग है जितने वो उतना खूब सूरत है//



मजे की बात है यारों कोई तारा नही वैसा/

फलक पर आज का महताब जितना खूब सूरत है/1/



चलो अब चाँद तुम अपनी मुहब्बत की सुनाओ कुछ/

सुना है चादनी मांझी का रिश्ता खूब सूरत है /2/



कोई हिंदी में लिखता है , कोई उर्दू में लिखता है/

लिखा जो भी गया है वो तराना खूब सूरत है/3/





कभी तुमसे गिरा था जो बरेली की बजारोमे /

तेरी… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on February 18, 2016 at 9:36am — 3 Comments

वो बचपन .......

बहर :- 122/122/122/122



हमें प्यार पहलू तू फिर से पढ़ा दे

न चुप बैठ ऐसे हदें सब मिटा दे



तकिया नकूशी रिवाजे बुझा के

तू मजहब भुला प्यार दीपक जला दे



मेरे गांव की तंग गलियों में उनसे

मेरा आमना सामना ही करा दे



बनाये मेरे साथ माटी खिलौने

वो बचपन वो घोड़े वो हांथी दिला दे



वो कश्ती वो बादल वो सावन वो झूले

मुझे आज सारे के सारे हि ला दे



समय तोड़ हद और दे फिर जवानी

मुहब्बत अता कर वो मैकश अदा दे



मेरे… Continue

Added by amod shrivastav (bindouri) on February 15, 2016 at 3:33pm — 3 Comments

दर्द खामोशियों

212 212 212 212
दर्द खामोशियों में लिखूंगा तुम्हे
गर मुनासिब हुआ तो सिउँगा तुम्हे

याद हर एक पन्ना किताबां बना
मैं जिगर में हमेशा रखूँगा तुम्हे

मैंकदों से नहीं है मेरा वास्ता
पर जरूरी हुआ तो पिऊंगा तुम्हे

हौसलों इस कदर टूट बिखरे अगर
तुम ही बोलो तो कैसे जिऊंगा तुम्हे

जिंदगी शक न कर तू मेरे वादे पर
मुस्कुराता हुआ ही मिलूँगा तुम्हे

Added by amod shrivastav (bindouri) on February 14, 2016 at 6:03pm — 1 Comment

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