For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की - उस के नाम पे धोखे खाते रहते हो

,

उस के नाम पे धोके खाते रहते हो
फिर भी उस के ही गुण गाते रहते हो.
.
उस के आगे बोल नहीं पाते हो तुम
मैं बोलूँ तो हाथ दबाते रहते हो.
.
कोई नया इस दुनिआ में कब आता है
तुम ही जा कर वापस आते रहते हो.
.
तुम को वापस अपने घर भी जाना है
क्यूँ दुनिआ से लाग  लगाते रहते हो.
.
अक्सर मिलता है वो इन्साँ पूजता है 
वो जिस को तुम ख़ुदा बताते रहते हो.
.
वाइज़ जी क्या तुम ने वो सब सीख लिया 
हम को जो कुछ तुम समझाते रहते हो.
.
वो ख़ालिक जाड़े में ठिठुरता रहता है 
चादर दरगाहों पे चढाते रहते हो.
.
वो सीढ़ी पर भूखा मरता रहता है
तुम पत्थर को भोग लगाते रहते हो.
.
जंग में है वो आओ “नूर” का रथ हाँको
क्या मुरली की तान सुनाते रहते हो.

.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 

Views: 641

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Shyam Narain Verma on September 16, 2024 at 2:10pm
नमस्ते जी, बहुत ही सुंदर प्रस्तुति, हार्दिक बधाई l सादर
Comment by Nilesh Shevgaonkar on January 12, 2022 at 8:03am

धन्यवाद आ. मनोज अहसास जी,

शे'र का भाव वही है जो शब्दों में है.. कुछ हिडेन नहीं है ..
ईश्वर स्वयं मनुष्य का पुजारी है क्यूँ कि ईश्वर को मनुष्य ने बनाया है 
सादर  

Comment by मनोज अहसास on January 12, 2022 at 12:18am

आदरणीय नूर साहब सादर नमस्कार 

बहुत सुंदर ग़ज़ल की हार्दिक बधाई

अक्सर मिलता है वो .........

इस शेर का भाव मुझे स्पष्ठ नहीं हुआ कृपया थोड़ी व्याख्या से समझाने की कृपा करें

सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 31, 2021 at 11:07am

आभार आ. लक्ष्मण जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 31, 2021 at 11:06am

आभार आ. गुरप्रीत जी 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 31, 2021 at 11:06am

आभार आ. समर सर 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 31, 2021 at 7:50am

आ. भाई नीलेश जी, बेहतरीन गजल हुई है। हार्दिक बधाई।

Comment by Gurpreet Singh jammu on December 31, 2021 at 7:49am

वाह आदरणीय नीलेश सर, बहुत खूबसूरत ग़ज़ल कही आपने।

Comment by Samar kabeer on December 30, 2021 at 3:48pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब , अच्छी ग़ज़ल कही आपने, बधाई स्वीकार करें I 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

आशीष यादव posted a blog post

मशीनी मनुष्य

आज के समय में मनुष्य मशीन बनता जा रहा है या उसको मशीन बनने पर मजबूर किया जाता है. कारपोरेट जगत…See More
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब, प्रस्तुत दोहों की सराहना हेतु आपका हार्दिक आभार। सादर"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय जयहिंद रायपुरी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर आपने  दोहा छंद रचने का सुन्दर प्रयास किया है।…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  सही कहना है हम भारतीय और विशेषकर जो अभावों में पलकर बड़े हुए हैं, हर…"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीया प्रतिभाजी हार्दिक धन्यवाद आभार आपका"
yesterday
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अशोक भाईजी  हार्दिक धन्यवाद आभार आपका।"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर, प्रदत्त चित्र पर मेरी प्रस्तुति की सराहना के लिए आपका हार्दिक…"
yesterday
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"    आदरणीया प्रतिभा पाण्डे जी सादर, प्रस्तुत दोहों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार ।…"
yesterday
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"किल्लत सारे देश में, नहीं गैस की यार नालियाँ बजबजा रही, हर घर औ हर द्वार गैस नहीं तो क्या हुआ, लोग…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। दोहों पर आपकी विस्तृत टिप्पणी और सुझाव के लिए हार्दिक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. प्रतिभा बहन, सादर अभिवादन। चित्रानुरूप सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
yesterday
pratibha pande replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 178 in the group चित्र से काव्य तक
"*पका न पाती  रोटियाँ, भले  युद्ध की आगजला रही है नित्य पर, वह निर्धन का…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service