For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल नूर की- कहीं से उड़ के परिन्दे कहीं पे उतरे हैं

कहीं से उड़ के परिन्दे कहीं पे उतरे हैं  
ख़ुदा से हो के ख़फ़ा हम ज़मीं पे उतरे हैं.
.
तुम्हारे ढब से मिली बारहा जो रुसवाई  
हर एक बात पे हाँ से नहीं पे उतरे हैं.
.
हमारी आँखों की झीलें भी इक ठिकाना है     
तुम्हारी यादों के सारस यहीं पे उतरे हैं.
.
हमारी फ़िक्र से नीचे फ़लक मुहल्ला है  
ये शम्स चाँद सितारे वहीं पे उतरे हैं.  
.
हज़ारों बार ज़मीं ने ये माथा चूमा है
उजाले सजदों के मेरे जबीं पे उतरे हैं.  
.
निलेश "नूर"
मौलिक/ अप्रकाशित 


Views: 321

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 31, 2021 at 11:06am

आभार आ. बृजेश जी 

Comment by बृजेश कुमार 'ब्रज' on December 30, 2021 at 11:23am

बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल कही है आदरणीय नीलेश जी...हरेक शे'र बेमिशाल

और मतला

कहीं से उड़ के परिन्दे कहीं पे उतरे हैं  
ख़ुदा से हो के ख़फ़ा हम ज़मीं पे उतरे हैं...जबरजस्त

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 27, 2021 at 7:53am

आभार आ. समर सर 

Comment by Samar kabeer on December 26, 2021 at 7:08pm

जनाब निलेश 'नूर' जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है, इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 24, 2021 at 10:43pm

आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,
//आपकी ग़ज़ल पर मैंने कोई इस्लाह देने की जसारत नहीं की है, पाठक के रूप में एक सवाल आपसे किया है, जिस पर आप नाराज़ हो गये।//
मेरी किस बात से आपको लगा कि मैं नाराज़ हो गया हूँ??
आप ही टिप्पणी करें, कोई जवाब दे तो आप ही तय कर लें कि कोई नाराज़ है या नहीं..
मैंने सिर्फ आपके जवाब में तीन बातें कही और वो तीनों बातें पूर्णत: ठीक हैं..
आप मेरे जवाब से इतने कुढ़ गये कि फिर बिना मांगे सलाह देने लगे कि मेरा आचरण कैसा हो..
मुझे न मीठे का शौक है न कसैले से परहेज़... अलबत्ता कोई यूँ ही कुछ भी कहने भर  को कहता रहे  तो दांत खट्टे ज़रूर कर देता हूँ ..
आपने कह दिया रुख//// क्या मतलब बनता है वहां  रुख का??? मैं क्यूँ मानूँ कि धरती ख़ुदा कि है///
आप अपने ऊटपटांग ख़याल थोपें और फिर जब जवाब जी हुजुरी में न हो तो आचरण पर भाषण दें?? 
ये अदबी भोंडा पन है.. और मैं नो नोंसेंस आदमी हूँ ... 
सनद रहे 
नमस्ते 


Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on December 24, 2021 at 10:56am

तीन बातें!

//1) तख़य्युल पर इस्लाह न हो।

2) यह आपकी मान्यता है कि ज़मीन भी ख़ुदा की है, मैं तो आसमान भी अपना ही मानता हूँ।

3) कोपभवन चाहे राजा का हो उस पर अधिकार रानियों का होता है। 

रही बात रुख़ की ,,, तो कतई नहीं, ढब को रुख़ कर के बेढ़ब नहीं करूँगा।//

आ. निलेश नूर साहिब, आपकी ग़ज़ल पर मैंने एक पाठक के तौर पर टिप्पणी की थी, और ग़ज़ल अच्छी लगी तो उस पर पसंदगी का इज़हार भी किया।

आपकी ग़ज़ल पर मैंने कोई इस्लाह देने की जसारत नहीं की है, पाठक के रूप में एक सवाल आपसे किया है, जिस पर आप नाराज़ हो गये।

मैंने ढब को रुख़ करने के लिए भी नहीं कहा मह्ज़ अपना नज़रिया पेश किया था, जिस से सहमत होना या असहमत होना आपका निर्णय है। 

एक बात कहूँगा कि सिर्फ़ मीठा खाने से कई बीमारियां जकड़ सकती हैं, कभी-कभी कुछ कसैला न चाहते हुए भी निगल लेना चाहिए। अपने पाठकों या फॉलोवर्स को झिड़कना या उनसे नाराज़ आप जैसे दानिशवरों को शोभा नहीं देता है।  शुभ-शुभ। 

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 23, 2021 at 10:47pm

धन्यवाद आ. अमीरुद्दीन अमीर साहब,

तीन बातें!

1) तख़य्युल पर इस्लाह न हो।

2) यह आपकी मान्यता है कि ज़मीन भी ख़ुदा की है, मैं तो आसमान भी अपना ही मानता हूँ।

3) कोपभवन चाहे राजा का हो उस पर अधिकार रानियों का होता है। 

रही बात रुख़ की ,,, तो कतई नहीं, ढब को रुख़ कर के बेढ़ब नहीं करूँगा।

सादर

Comment by Nilesh Shevgaonkar on December 23, 2021 at 10:42pm

धन्यवाद आ. लक्ष्मण जी

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' on December 23, 2021 at 9:08pm

आदरणीय निलेश शेवगाँवकर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ।

"ख़ुदा से हो के ख़फ़ा हम ज़मीं पे उतरे हैं."  इस मिसरे पर नज़र् ए सानी फ़रमाएं, ज़मीं भी ख़ुदा की ही कायनात का हिस्सा है।

''तुम्हारे ढब से मिली"   "तुम्हारे रुख़ से मिली"   सादर। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on December 23, 2021 at 2:15pm

आ. भाई नीलेश जी, सादर अभिवादन। बेहतरीन गजल हुई है । हार्दिक बधाई.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

amita tiwari posted a blog post

बरगद गोद ले लिया

ज़मीन पर पड़ा  अवशेषबरगद का मूल आधार शेष सोचता है आजकल तक था बरगद विशालबरगदी सोच,बरगदी ख्यालबरगदी…See More
5 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आ ०  नाथ सोनांचली जी आपकी  टिप्पणी के लिए  आभार .मुझे  प्रोत्साहन मिला है…"
5 hours ago
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आ०  चेतन प्रकाश जी  सुप्रभात  आपकी  टिप्पणी और सुझावों के लिए आभारी हूँ…"
5 hours ago
Rakshita Singh commented on Sushil Sarna's blog post आँधियों से क्या गिला. . . . .
"आदरणीय सुशील जी, सादर प्रणाम । बहुत ही खूबसूरत पंक्तियाँ हार्दिक बधाई स्वीकार करें। "
6 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

क्या रंग है आँसू का

क्या रंग है आँसू का कैसे कोई बतलाएगा?सुख का है या दु:ख का है ये कोई कैसे समझाएगा?कभी किसी के खो…See More
10 hours ago
नाथ सोनांचली posted a blog post

अर्धांगिनी को समर्पित (दुर्मिल सवैया पर आधारित)

तुम फूल कली तुम चन्द्र मुखी तुम स्वर्ग परी चित चंचल हो तुम लौकिक केवल देह  नहीं  मकरन्द  भरा नव …See More
10 hours ago
Sushil Sarna posted blog posts
10 hours ago
नाथ सोनांचली commented on amita tiwari's blog post बरगद गोद ले लिया
"आद0 अमिता तिवारी जी सादर अभिवादन। बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार जी"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post दोहा मुक्तक .....
"आद0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बढ़िया दोहा मुक्तक हुआ है। बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on AMAN SINHA's blog post पश्चाताप
"आद0 अम्न सिन्हा जी सादर अभिवादन बढ़िया सृजन है। बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on Sushil Sarna's blog post सिन्दूर -(क्षणिकाएँ )
"आद 0 सुशील सरना जी सादर अभिवादन। बेहतरीन सृजन,, भाव परक।बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago
नाथ सोनांचली commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post मातृ दिवस पर गजल -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आद0 लक्ष्मण धामी मुसाफिर जी सादर अभिवादन बढ़िया माँ को समर्पित रचना है। बधाई स्वीकार कीजिये"
12 hours ago

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service