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यहाँ तू नहीं ये कमी तो रहेगी 

उदासी जहन  में जमी तो रहेगी 

 

हटेगी नहीं जब ये कुहरे की चादर 

वहाँ बस्तियों में नमी तो रहेगी 

 

नहीं जब तलक कोई साहिल मिलेगा 

मुहब्बत की कश्ती थमी तो रहेगी 

 

करे जो तू शिरकत जरा इस चमन में 

हवा ये सुगन्धित रमी तो रहेगी 

 

 

भले मौन हो जाए  तेरा नसीबा 

कहीं ना कहीं सरग़मी  तो रहेगी 

 

वफ़ा क्या करोगे मैं सब जानती हूँ 

रगो  में झलक पश्चिमी तो रहेगी 

 

लिखे ना लिखे "राज" तुझ पे ग़ज़ल वो 

फ़कत दीद की  मरहमी तो रहेगी 

 

 

****************************

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 13, 2013 at 5:41pm

सर्व प्रथम तो आपका स्वागत है गीतिका जी ,तहे दिल से शुक्रिया आपको ग़ज़ल पसंद आई 

Comment by वेदिका on February 13, 2013 at 5:34pm

वफ़ा क्या करोगे मैं सब जानती हूँ  रगो में झलक पश्चिमी तो रहेगी 

बहुत खूब!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 4, 2013 at 11:55am

विजय मिश्र जी शेर के मर्म ने आपको छुआ आपको पसंद आया तहे दिल से शुक्रिया 

Comment by विजय मिश्र on February 4, 2013 at 11:36am

" वफ़ा क्या करोगे मैं सब जानती हूँ 

   रगो  में झलक पश्चिमी तो रहेगी | "

ये बंद हटके है और ईमानदारी से आज की बात कहता है . अच्छा लगा .


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 4, 2013 at 11:29am

राम शिरोमणि जी आपको ग़ज़ल पसंद आई दिल से आभारी हूँ |

Comment by ram shiromani pathak on February 4, 2013 at 11:27am

बहुत सुन्दर ग़ज़ल मैम..बधाई स्वीकारें...


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 4, 2013 at 11:00am

आदरणीय अशोक रक्ताले  जी दिली आभार स्वीकारे आपको ग़ज़ल पसंद आई मेरी कलम को संबल मिला 

Comment by Ashok Kumar Raktale on February 4, 2013 at 8:59am

हटेगी नहीं जब ये कुहरे की चादर 

वहाँ बस्तियों में नमी तो रहेगी ................बहुत खूब!

आदरेया राजेश कुमारी जी सादर, सुन्दर गजल सभी अशार बढ़िया है दाद कुबुलें.सादर.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 3, 2013 at 7:34pm

प्रिय आरती शर्मा जी  तहे दिल से शुक्रिया आपको ग़ज़ल पसंद आई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 3, 2013 at 7:33pm

प्रिय प्राची जी तहे दिल से शुक्रिया आपको ग़ज़ल पसंद आई 

कृपया ध्यान दे...

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