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3. क्षणिकाएं :.....

1.

मैं
कभी मरता नहीं
जो मरता है
वो
मैं नहीं
... ... ... ... ... ... ...

2.

ज़िस्म बिना
छाया नहीं
और ]
छाया का कोई
जिस्म नहीं
... ... ... ... ... ... ... ...

3.
क्षितिज
तो आभास है
आभास का
कोई छोर नहीं
छोर
तो यथार्थ है
यथार्थ का कोई
क्षितिज नहीं

सुशील सरना
मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 530

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Comment by Sushil Sarna on January 27, 2018 at 7:52pm

आदरणीय  vijay nikore  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 27, 2018 at 7:52pm

आदरणीय Mahendra Kumar   जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 27, 2018 at 7:51pm

आदरणीय Mohammed Arif   जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by Sushil Sarna on January 27, 2018 at 7:51pm

आदरणीय Samar kabeer  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by vijay nikore on January 18, 2018 at 8:43am

सुन्दर भाव... सुन्दर कथन । आपको हार्दिक बधाई, आदरणीय सुशील जी।

Comment by Mahendra Kumar on January 17, 2018 at 7:49pm

शानदार क्षणिकाएँ है आ. सुशील सरना जी. हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए. सादर.

Comment by Mohammed Arif on January 17, 2018 at 5:36pm

आदरणीय सुशील सरना जी आदाब,

                              उम्दा क्षणिकाएँ । हार्दिक बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Samar kabeer on January 17, 2018 at 2:11pm

जनाब सुशील सरना जी आदाब,बहुत उम्दा और वैचारिक क्षणिकाएं लिखीं हैं,मज़ा आ गया,इस प्रस्तुति पर बधाई स्वीकार करें ।

Comment by Sushil Sarna on January 16, 2018 at 6:20pm

आदरणीय  narendrasinh chauhan  जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार।

Comment by narendrasinh chauhan on January 16, 2018 at 5:59pm

बहोत सुन्दर 

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