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हक़बयानी लिख रहे हैं  - ग़ज़ल - बसंत

 

मापनी २१२२ २१२२ २१२२ २१२२ 

दूध को जो दूध और पानी को पानी लिख रहे हैं 

लोग वो कम ही बचे जो हक़बयानी लिख रहे हैं 

 

खेत में ओले पड़े हैं नष्ट सब कुछ हो चुका है 

कूल है मौसम बहुत वे ऋतु सुहानी लिख रहे हैं 

 

बस्तियाँ सुनसान हैं अब चुभ रहीं तीखी हवाएँ 

सूने-सूने घर महकती रातरानी लिख रहे हैं 

 

आस में अच्छे दिनों की गाँव छोड़ा था जिन्होंने

रोज रोटी नोन लकड़ी की कहानी लिख रहे हैं  

 

मानिए मत मानिए पर आज हम अपने हृदय को 

आपके कोमल हृदय की राजधानी लिख रहे हैं 

"मौलिक एवं अप्रकाशित" 

 

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 3, 2020 at 10:41am

आदरणीय श्री सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' जी सादर नमस्कार , आपकी हौसलाअफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by सुरेन्द्र नाथ सिंह 'कुशक्षत्रप' on May 2, 2020 at 6:35pm

आद0 बसन्त कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन। बढ़िया ग़ज़ल कही आपने। बधाई स्वीकार कीजिये।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 1, 2020 at 12:57pm

आदरणीय  सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई  के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 1, 2020 at 12:56pm

आदरणीय डॉ छोटेलाल सिंह  जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई  के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 1, 2020 at 12:56pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर 'जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई  के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on May 1, 2020 at 12:56pm

आदरणीय TEJ VEER SINGH जी सादर नमस्कार, आपकी हौसलाअफजाई  के लिए दिल से शुक्रिया 

Comment by सालिक गणवीर on April 30, 2020 at 6:11pm
आस में अच्छे दिनों की गाँव छोड़ा था जिन्होंने....
भाई बसंत कुमार जी,बेहद उम्दा ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद.
Comment by डॉ छोटेलाल सिंह on April 30, 2020 at 9:11am

आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी सादर अभिवादन आपकी गजल यथार्थ को समाहित किये हुए बेहतरीन भावों को उजागर कर रही है ,पढ़कर मन खुश हो गया ,बहुत बहुत बधाई

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on April 29, 2020 at 10:44pm

आ. भाई बसंत कुमार जी, सादर अभिवादन । एक उम्दा गजल हुई है । हार्दिक बधाई ।

Comment by TEJ VEER SINGH on April 29, 2020 at 5:51pm

हार्दिक बधाई आदरणीय बसंत कुमार जी। बेहतरीन गज़ल।

आस में अच्छे दिनों की गाँव छोड़ा था जिन्होंने

रोज रोटी नोन लकड़ी की कहानी लिख रहे हैं  

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