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मेरे ही प्यार में पगी आई. - ग़ज़ल

फ़ाइलातुन मुफ़ाइलुन फ़ेलुन

2122 1212 22 

मेरे ही प्यार में पगी आई. 

पास जब मेरी ज़िन्दगी आई. 

 

उनके हिस्से में कुछ नहीं आया,

जिनको करना न बंदगी आई. 

 

न किसी से लगा सके दिल को,

दिल से करना न दिल्लगी आई.

 

मेरी आँखों में देखकर आँसू,

उनके चेहरे पे ताज़गी आई.

 

प्यास सबकी बुझाई दरिया ने,

मेरे हिस्से में तिश्नगी आई.

 

दिल में जो था वो कह दिया मैंने, 

पर न मुझको अदायगी आई.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

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Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 12, 2020 at 6:21pm

आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी सादर नमस्कार 

दिल से शुक्रिया आपकी हौसलाफजाई के लिए 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 12, 2020 at 6:21pm

आदरणीय सालिक गणवीर जी सादर नमस्कार 

दिल से शुक्रिया आपकी हौसलाफजाई के लिए 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 12, 2020 at 6:21pm

आदरणीय Madhu Passi 'महक'  जी सादर नमस्कार 

दिल से शुक्रिया आपकी हौसलाफजाई के लिए 

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 12, 2020 at 6:20pm

आदरणीय अमीरुद्दीन 'अमीर' जी आदाब , आपकीहै निरंतर हौसलाफजाई के लिए दिल से शुक्रिया 

जिंदगी को प्रेमिका के प्रतीक रूप में लिया है 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on August 12, 2020 at 6:36am

आ. भाई बसंतकुमार जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई । 

Comment by सालिक गणवीर on August 11, 2020 at 3:22pm

भाई बसंत कुमार शर्मा जी

सादर अभिवादन

उम्दा ग़ज़ल कही है आपने जनाब,दाद और मुबारकबाद स्वीकार करें.

Comment by Madhu Passi 'महक' on August 11, 2020 at 12:21pm
आदरणीय बसंत कुमार शर्मा जी सादर नमस्कार! ग़ज़ल बहुत ही अच्छी हुई, इसके लिए बधाई स्वीकार करें।
Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on August 10, 2020 at 10:45pm

जनाब बसंत कुमार शर्मा जी आदाब, मतला समझने में क़ासिर हूँ, इस के इलावा ग़ज़ल के सभी अशआ़र लाजवाब हुए हैं, दाद के साथ मुबारकबाद पेश करता हूँ।  सादर।

Comment by बसंत कुमार शर्मा on August 10, 2020 at 8:29pm

आदरणीय  आशीष यादव जी सादर नमस्कार 

आपकी हौसलाफजाई का दिल से शुक्रिया 

Comment by आशीष यादव on August 10, 2020 at 7:27pm

बहुत सुंदर। बड़े ही सहज ढँग से आपने बातों को कह दिया। बहुत बहुत बधाई हो।

कृपया ध्यान दे...

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