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बाह रे भगवान तहार अजबे बा माया ,

बाह रे भगवान तहार अजबे बा माया ,
कही बाटे धुप त कही बाटे छाया ,
जेकरा लागे बाटे,
ओके खूब देत बारs ,
जेकरा लागे नइखे ,
ओकर पेटो ना भरत बारs ,
बाह रे भगवान तहार अजबे बा माया ,
कही बाटे धुप त कही बाटे छाया ,
जेकरा लागे पाईसा बा ,
उ भगवान के जइसन बा
तहरे अइसन इहो ,
अब कम त करत बा ,
जेकरा लागे बाटे ,
ओकरे के पूछत बा ,
जेकरा लागे नइखे ,
ओके दूर से नमस्कार ,
बाह रे भगवान तहार अजबे बा माया ,
कही बाटे धुप त कही बाटे छाया ,

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on September 6, 2010 at 6:56pm
bahut sundar ...samaj me vyapt visangatiyon ka achcha varnan kiya hai is kavita me apane|

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 31, 2010 at 8:37pm
guru jee, rauwa apana kavita key madhyam sey bahut sahi baat uthawley baani ehey aaj key samay mey ho rahal ba, bahut badhiya kavita lagal, dhanyabad.
Comment by Raju on March 31, 2010 at 6:15pm
bahut badhiya Guru bhaiya.......
Comment by Admin on March 31, 2010 at 4:23pm
जी गुरु जी रौवा बिलकुल ठीक कहत बानी, भगवान् के माया बहुत अजीब बा कोई खात खात मरत बा कोई खैला बिना मर रहल बा, निमन रचना बा , धन्यवाद बा राउर, ऐसाही लिखत रही,

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