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हम तो हल के दास ओ राजा-लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२/२२/२२/२२


हम तो हल के दास ओ राजा
कम देखें  मधुमास  ओ राजा।१।
*
रक्त  को  हम  हैं  स्वेद  बनाते
क्या तुमको आभास ओ राजा।२।
*
अन्न तुम्हारे पेट में भरकर
खाते हैं सल्फास ओ राजा।३।
*
पीता  हर  उम्मीद  हमारी
कैसी तेरी प्यास ओ राजा।४।
*
हम से दूरी  मत  रख इतनी
आजा थोड़ा पास ओ राजा।५।
*
खेती - बाड़ी  सब  सूखेगी
जो तोड़ेगा आस ओ राजा।६।

मौलिक/अप्रकाशित
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

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Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 9, 2021 at 9:10pm

आ. भाई समर जी, पुनः उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार...

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 9, 2021 at 9:08pm

आ. भाई समर जी, पुनः उपस्थिति व स्नेह के लिए आभार...

Comment by Samar kabeer on February 9, 2021 at 6:58pm

'अन्न जगत के पेट में भरकर'

ये मिसरा ठीक है ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 9, 2021 at 6:25pm

आ. भाई समर जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, सलाह व उत्साहवर्धन के लिए आभार..

 "अन्न जगत के पेट में भरकर' या अन्न सभी के लिए उगाकर/यह मिसरा ठीक रहेगा क्या, सुझाईएगा.

Comment by Samar kabeer on February 9, 2021 at 5:56pm

जनाब लक्ष्मण धामी 'मुसाफ़िर' जी आदाब, ग़ज़ल का प्रयास अच्छा है, बधाई स्वीकार करें ।

 
'क्या तुमको आभास ओ राजा'

इस मिसरे में 'तुमको' की जगह "तुझको" शब्द उचित होगा,ग़ौर करें ।

'अन्न तुम्हारे पेट में भरकर
खाते हैं सल्फास ओ राजा'

इस शैर के ऊला में 'तुम्हारे' शब्द उचित नहीं,मिसरा बदलने का प्रयास करें ।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 9, 2021 at 4:55pm
आ. प्रधान सम्पादक महोदय मेरी रचना को फीचर्ड में सम्मिलित करने हेतु हार्दिक आभार ..
Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 4, 2021 at 10:35pm

आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Comment by अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी on February 4, 2021 at 10:10pm

जनाब लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, अच्छी ग़ज़ल हुई है मुबारकबाद पेश करता हूँ। सादर।

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 4, 2021 at 8:53pm

आ. भाई आज़ी तमाम जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद। 

Comment by लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' on February 4, 2021 at 8:51pm

आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए आभार । 

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